Shri Pratihareshwar Mahadev

Shri Pratihareshwar Mahadev Ujjain: चौरासी महादेव यात्रा के 20वें महादेव का इतिहास और पौराणिक कथा

Shri Pratihareshwar Mahadev : उज्जैन (अवंतिका) की पावन और मोक्षदायिनी भूमि पर साक्षात महादेव 84 अलग-अलग दिव्य स्वरूपों में निवास करते हैं। जो भी भक्त उज्जैन की प्रसिद्ध चौरासी महादेव यात्रा पर निकलता है, उसकी यात्रा में भगवान शिव के रक्षक स्वरूपों का विशेष स्थान होता है। इस पवित्र यात्रा श्रृंखला के 20वें (20th) महादेव: Shri Pratihareshwar Mahadev Ujjain का स्थान जीवन के सभी संकटों, शत्रु बाधाओं और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा प्रदान करने वाला माना जाता है।

स्कंद पुराण के अवंति खंड के अनुसार, इनके केवल दर्शन और पूजन से ही मनुष्य को आत्मबल, पदोन्नति, वंश वृद्धि और सातों जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है। आइए, बेहद सरल और आम बोलचाल की भाषा में जानते हैं कि इस प्राचीन मंदिर का सही स्थान क्या है, इसकी अद्भुत पौराणिक कथा क्या है और यहाँ पूजन करने से क्या-क्या लाभ मिलते हैं।

प्रतिहारेश्वर महादेव के दर्शन का धार्मिक महत्व और दिव्य श्लोक (Significance & Shlok)

स्कंद पुराण के अवंति खंड में चौरासी महादेव यात्रा के इस 20वें शिवलिंग की महिमा का पावन श्लोक इस प्रकार दर्ज है:

विंशतिं विद्धि देवेशि ख्यातं प्रतिहारेश्वरम्।
यस्य दर्शनमात्रेण सर्वबाधा प्रमुच्यते।।

सरल अर्थ: हे देवी! तुम जानो कि अवंतिका क्षेत्र में स्थित यह बीसवां (20th) शिवलिंग ‘प्रतिहारेश्वर’ के नाम से विख्यात है, जिसके केवल दर्शन कर लेने मात्र से ही मनुष्यों की सभी बाधाएं और संकट पूरी तरह समाप्त हो जाते हैं।

  • शत्रु बाधा और भय से सुरक्षा: चूँकि इस मंदिर का संबंध शिव के रक्षक (प्रतिहार) स्वरूप से है, इसलिए यहाँ पूजन करने से शत्रुओं का भय, तंत्र बाधाएं और नकारात्मक शक्तियाँ तुरंत दूर होती हैं।
  • पद-प्रतिष्ठा और करियर में उन्नति: नौकरी में प्रमोशन, व्यापार में सफलता और रुका हुआ मान-सम्मान वापस पाने के लिए प्रतिहारेश्वर महादेव का अभिषेक अचूक माना जाता है।
  • चारों पुरुषार्थ और वंश वृद्धि: शास्त्रों के अनुसार, यहाँ नियमित दर्शन से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष (चारों पुरुषार्थों) की प्राप्ति होती है और संतान सुख के साथ वंश की वृद्धि होती है।
  • 7 जन्मों के पापों का नाश: कलयुग में इस मंदिर के केवल दर्शन कर लेने से ही मनुष्य के पिछले 7 जन्मों के संचित पापों का क्षय हो जाता है।

Pratihareshwar Mahadev Mandir उज्जैन कहाँ स्थित है? (Location & Route)

उज्जैन शहर के ऐतिहासिक और घने व्यापारिक क्षेत्र में स्थित होने के कारण इस दिव्य मंदिर तक पहुँचना बहुत ही आसान है।

  • सटीक स्थान: पटनी बाजार उज्जैन Pratihareshwar Mahadev मंदिर शहर के सुप्रसिद्ध पटनी बाजार क्षेत्र में नागनाथ की गली (कमरी मार्ग) के भीतर स्थित है।
  • स्थानीय पता: यह मंदिर 19वें महादेव (श्री नागचंडेश्वर महादेव) के मंदिर परिसर के भीतर ही स्थापित है। यहाँ एक ही परिसर में भक्तों को 19वें और 20वें दोनों महादेवों के दर्शन का महापुण्य प्राप्त हो जाता है।
  • कैसे पहुँचें: महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर या प्रसिद्ध गोपाल मंदिर से पटनी बाजार की दूरी 1 किलोमीटर से भी कम है। आप ई-रिक्शा, ऑटो या पैदल ही कमरी मार्ग / नागनाथ की गली में आकर इस पावन मंदिर के दर्शन कर सकते हैं।

मंदिर का अत्यंत पावन और दिव्य स्वरूप (Temple Architecture)

Pratihareshwar Mahadev Temple Ujjain का वातावरण अत्यंत प्राचीन, गुप्त और आध्यात्मिक शक्तियों से भरा हुआ है।

  • यहाँ गर्भगृह में एक अत्यंत दिव्य और पौराणिक स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है, जिसे भगवान शिव के रक्षक (द्वारपाल/प्रतिहार) स्वरूप की ऊर्जा का केंद्र माना जाता है।
  • खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टि से यह मंदिर पूर्वोत्तर दिशा और भूमध्य रेखा के ऊर्जा संरेखण को संतुलित करने वाला माना गया है।
  • मंदिर का शांत वातावरण भक्तों के मन से भय को दूर कर उनमें अपार सकारात्मक ऊर्जा और आत्मबल का संचार करता है।

प्रतिहारेश्वर महादेव की पौराणिक कथा: नंदी जी के प्रतिहार स्वरूप और श्रापमुक्ति की कहानी (Legend of Pratihareshwar Mahadev)

स्कंद पुराण के अवंति खंड के अंतर्गत प्रतिहारेश्वर महादेव मंदिर उज्जैन का इतिहास और इनकी स्थापना की एक अत्यंत शिक्षाप्रद और अनोखी कथा मिलती है:

पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ, उसके बाद वे सैकड़ों वर्षों तक मंदर पर्वत पर एकांतवास में रहे। इस बात से समस्त देवताओं में भारी चिंता फैल गई। देवताओं को भय सताने लगा कि यदि भगवान शिव के तेज से बालक का जन्म हुआ, तो वह इतना शक्तिशाली होगा कि तीनों लोकों में उथल-पुथल मच जाएगी।

देवताओं ने अपने गुरु से मार्गदर्शन मांगा। देवगुरु ने उपाय बताया कि सभी देवता तुरंत महादेव के पास जाएं और उनसे यह सृष्टि संतुलन बनाए रखने की गुहार लगाएं।

सभी देवता तुरंत मंदर पर्वत पहुँचे, लेकिन द्वार पर भगवान शिव के परम भक्त और द्वारपाल नंदी (प्रतिहार) पहरा दे रहे थे। नंदी जी ने देवताओं को अंदर जाने से रोक दिया और कहा कि महादेव की आज्ञा के बिना कोई भी भीतर प्रवेश नहीं कर सकता।

तब देवराज इंद्र के कहने पर अग्निदेव ने एक युक्ति अपनाई। अग्निदेव ने एक सुंदर ‘हंस’ का रूप धारण किया और नंदी जी की नजरों से बचकर चुपके से रनिवास के भीतर प्रवेश कर गए। हंस बने अग्निदेव ने सीधे महादेव के पास पहुँचकर उनके कान में धीरे से कहा, “हे प्रभु! समस्त देवगण द्वार पर खड़े आपका इंतजार कर रहे हैं।”

अग्निदेव की बात सुनकर भगवान शिव तुरंत बाहर आए और उन्होंने देवताओं की प्रार्थना स्वीकार कर ली। लेकिन अपनी ड्यूटी (द्वारपाल की जिम्मेदारी) में थोड़ी सी लापरवाही के कारण महादेव अपने द्वारपाल नंदी पर रुष्ट हो गए। भगवान शिव ने नंदी को पृथ्वी लोक पर गिरने का श्राप दे दिया।

नंदी जी पृथ्वी पर गिरकर अत्यंत दुखी होकर विलाप करने लगे। तब देवताओं ने नंदी जी को ढांढस बंधाया और उन्हें तुरंत ‘महाकाल वन’ (उज्जैन) जाकर भगवान शिव की आराधना करने की सलाह दी। नंदी जी ने महाकाल वन आकर शिप्रा तट के समीप एक पावन शिवलिंग की स्थापना की और कठोर तपस्या व पूजन शुरू कर दिया।

नंदी जी की अनन्य भक्ति से प्रसन्न होकर शिवलिंग से दिव्य वाणी गूंजी, “हे नंदी! तुम्हारी इस भक्ति से मैं अत्यंत प्रसन्न हूँ। तुम अपने द्वारपाल के पद पर पुनः प्रतिष्ठित होते हो। चूंकि तुमने द्वारपाल (प्रतिहार) के रूप में यहाँ मेरी आराधना की है, इसलिए यह शिवलिंग संसार में प्रतिहारेश्वर महादेव के नाम से पूजा जाएगा।”

दर्शन के लिए सबसे उत्तम और शुभ समय (Best Time to Visit)

Shri Pratihareshwar Mahadev Mandir में पूजा प्रतिदिन की जा सकती है, लेकिन कुछ विशेष अवसरों पर यहाँ दर्शन का अनंत फल मिलता है:

  • श्रावण (सावन) का पावन महीना और अधिक मास (पुरुषोत्तम मास)।
  • सोमवार और प्रदोष व्रत का दिन, जो भगवान शिव की कृपा पाने के लिए सबसे उत्तम है।
  • प्रत्येक महीने की चतुर्दशी तिथि।
  • महाशिवरात्रि, इस महापर्व पर पटनी बाजार के इस ऐतिहासिक मंदिर में विशेष रुद्राभिषेक, महाआरती और सुंदर श्रृंगार का आयोजन किया जाता है।

FAQ: Pratihareshwar Mahadev Mandir Ujjain से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सवाल

प्रश्न 1: चौरासी महादेव यात्रा में प्रतिहारेश्वर महादेव का कौन सा स्थान है?

उत्तर: Shri Pratihareshwar Mahadev Ujjain की प्रसिद्ध चौरासी महादेव यात्रा श्रृंखला के 20वें (20th) क्रम पर आते हैं।

प्रश्न 2: प्रतिहारेश्वर महादेव का मंदिर उज्जैन में कहाँ स्थित है?

उत्तर: Shri Pratihareshwar Mahadev मंदिर उज्जैन के पटनी बाजार क्षेत्र में कमरी मार्ग / नागनाथ की गली के भीतर, 19वें महादेव (श्री नागचंडेश्वर) के मंदिर परिसर में ही स्थित है।

प्रश्न 3: प्रतिहारेश्वर महादेव की पौराणिक कहानी किससे जुड़ी है?

उत्तर: इनकी पौराणिक कथा भगवान शिव के द्वारपाल (प्रतिहार) नंदी जी के श्रापमुक्त होने और महाकाल वन में आकर शिवलिंग की स्थापना कर पुनः अपना स्थान प्राप्त करने से जुड़ी हुई है।

प्रश्न 4: Shri Pratihareshwar Mahadev मंदिर में दर्शन करने से मुख्य रूप से क्या लाभ मिलता है?

उत्तर: यहाँ दर्शन व पूजन करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं, शत्रुओं पर विजय मिलती है, संतान सुख और वंश की वृद्धि होती है तथा 7 जन्मों के पाप नष्ट होते हैं।

Dharmkahani.com

दोस्तों हम 84 महादेव की सीरीज में आपके लिए हम उज्जैन में स्थित 84 Mahadev के मंदिर के बारे में बता रहे हैं जिसमे मंदिर की कथा और उन शिवलिंग की पूजा महत्व शामिल हैं। कृपया आप ऐसे ही हमारे द्वारा दी गयी जानकारी को अपने दोस्तों और परिवार जानो पहुचाये। आपको कोई और जानकारी चाहिए तो आप हम कमेंट या contact पेज के जरिये संपर्क कर सकते है।

Disclaimer: हमारे द्वारा दिए गए 84 महादेव सीरीज के 84 महादेव कथा, पूजन का महत्त्व कई इंटरनेट सोर्सेज के माध्यम से लिए गए है। लेकिन इंटरनेट और अन्य कई ग्रंथो यह लिस्ट अलग भी हो सकती हैं। अगर इसमें आपको कोई गलती लगाती है तो कृपया आप हमें हमारे ऑफिसियल ईमेल पर जरूर बताये।

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