Shri Nagchandeshwar Mahadev : उज्जैन (अवंतिका) की पावन और मोक्षदायिनी भूमि पर साक्षात महादेव 84 अलग-अलग दिव्य स्वरूपों में निवास करते हैं। जो भी भक्त उज्जैन की प्रसिद्ध चौरासी महादेव यात्रा पर निकलता है, उसकी यात्रा में नागों के अधिपति और शिव कृपा के प्रतीक मंदिरों का विशेष महत्व होता है। इस पवित्र यात्रा श्रृंखला के 19वें (19th) महादेव Shree Nagchandeshwar Mahadev Ujjain का स्थान कालसर्प दोष, सर्प भय और सभी प्रकार के संचित पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है।
स्कंद पुराण के अवंति खंड के अनुसार, इनके केवल दर्शन और पूजन से ही मनुष्य के बड़े से बड़े पाप दूर हो जाते हैं और जीवन में आरोग्य व यश की प्राप्ति होती है। आइए, बेहद सरल और आम बोलचाल की भाषा में जानते हैं कि इस प्राचीन मंदिर का सही स्थान क्या है, इसकी अद्भुत पौराणिक कथा क्या है और यहाँ पूजन करने से क्या-क्या लाभ मिलते हैं।
Ujjain 84 Mahadev Nagchandeshwar Mahadev(19): श्री नागचंडेश्वर महादेव उज्जैन
स्कंद पुराण के ‘चतुरशीतिलिंग माहात्म्य’ में चौरासी महादेव यात्रा के इस 19वें शिवलिंग की महिमा का पावन श्लोक इस प्रकार दर्ज है:
एकोनविंशतिं विद्धि ख्यातं नागचण्डेश्वरम्।
यस्य दर्शनमात्रेण सर्वपापैः प्रमुच्यते।।
सरल अर्थ: सरल अर्थ: हे देवी! तुम जानो कि अवंतिका क्षेत्र में स्थित यह उन्नीसवां (19th) शिवलिंग ‘नागचंडेश्वर’ के नाम से विख्यात है, जिसके केवल दर्शन कर लेने मात्र से ही मनुष्य अपने सभी संचित पापों से पूरी तरह मुक्त हो जाता है।
नागचंडेश्वर महादेव मंदिर उज्जैन कहाँ स्थित है? (Location & Route)
उज्जैन शहर के ऐतिहासिक और घने व्यापारिक क्षेत्र में स्थित होने के कारण इस दिव्य मंदिर तक पहुँचना बहुत ही आसान है।
सटीक स्थान: पटनी बाजार उज्जैन नागचंडेश्वर महादेव मंदिर शहर के प्रसिद्ध पटनी बाजार क्षेत्र में नागनाथ की गली (कमरी मार्ग) के भीतर स्थित है।
स्थानीय पता: पटनी बाजार में 16वें महादेव (श्री ईशानेश्वर) और 18वें महादेव (श्री कलकलेश्वर) के समीप ही नागनाथ की गली में यह प्राचीन मंदिर स्थापित है। इस मंदिर परिसर के भीतर ही चौरासी महादेव यात्रा के 20वें महादेव (श्री प्रतिहारेश्वर महादेव) भी विराजमान हैं।
कैसे पहुँचें: महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर या गोपाल मंदिर से पटनी बाजार की दूरी बहुत कम है। आप ई-रिक्शा, ऑटो या पैदल ही कमरी मार्ग / नागनाथ की गली में आकर इस पावन मंदिर के दर्शन कर सकते हैं।
मंदिर का अत्यंत पावन और दिव्य स्वरूप (Temple Architecture)
Nagchandeshwar Mahadev Temple Ujjain का वातावरण अत्यंत प्राचीन और आध्यात्मिक शक्तियों से भरा हुआ है।
- यहाँ गर्भगृह में एक अत्यंत दिव्य और पौराणिक शिवलिंग स्थापित है, जिसे ईशान कोण की दिव्य ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
- चौरासी महादेव यात्रा का 19वां मंदिर होने के कारण इसका संबंध भगवान शिव के नाग आभूषण और चंद्र स्वरूप की संयुक्त कृपा से है।
- मंदिर का शांत वातावरण भक्तों को मानसिक एकाग्रता प्रदान करता है और यहाँ पूजन करने से मन से भय पूरी तरह दूर हो जाता है।
नागचंडेश्वर महादेव की पौराणिक कथा: देवताओं के निष्पाप होने की कहानी (Legend of Nagchandeshwar Mahadev)
पौराणिक काल में एक बार देवराज इंद्र की सुधर्मा सभा में देवर्षि नारद पधारे। इंद्रदेव ने हाथ जोड़कर पूछा, “हे देवर्षि! आपने तीनों लोकों का भ्रमण किया है, कृपया मुझे पृथ्वी पर कोई ऐसा सर्वश्रेष्ठ स्थल बताइए जो तुरंत पापों को नष्ट कर मोक्ष प्रदान करने वाला हो?”
देवर्षि नारद ने उत्तर दिया, “हे देवराज! पृथ्वी पर प्रयाग श्रेष्ठ तीर्थ है, लेकिन उससे भी दस गुना अधिक पवित्र और सुंदर महाकाल वन में स्थित अवंतिका (उज्जैन) है, जहाँ केवल दर्शन करने से ही मुक्ति मिल जाती है।”
नारद जी की बात सुनकर देवराज इंद्र सभी देवताओं के साथ अपने विमानों में सवार होकर महाकाल वन पहुँचे। जब देवताओं ने वहाँ देखा, तो अवंतिका के कण-कण में करोड़ों शिवलिंग विराजमान थे और चारों तरफ शिव-निर्माल्या (शिवलिंग पर चढ़ी पूजित सामग्री) फैली हुई थी।
शास्त्रों में शिव-निर्माल्या को लांघना (पैर से पार करना) भारी पाप माना गया है। इस पाप के डर से सभी देवता घबरा गए और स्वर्गलोक लौटने लगे।
उसी समय देवताओं को एक परम तेजस्वी दिव्य पुरुष अत्यंत प्रसन्न मुद्रा में स्वर्ग की ओर जाता हुआ दिखाई दिया। देवताओं ने उससे पूछा, “तुम कौन हो और तुम्हें शिव-निर्माल्या लांघने का दोष क्यों नहीं लगा?”
उस दिव्य पुरुष ने उत्तर दिया, “मैं महाकाल का भक्त हूँ और मेरा नाम नागचंडेश्वर है। ईशानेश्वर महादेव के ईशान कोण में एक अत्यंत गुप्त और चमत्कारी शिवलिंग स्थापित है। उस शिवलिंग के केवल दर्शन करने से ही शिव-निर्माल्या लांघने का दोष और जीवन के सभी बड़े पाप पल भर में भस्म हो जाते हैं।”
उस दिव्य भक्त नागचंडेश्वर का मार्गदर्शन पाकर सभी देवता तुरंत ईशानेश्वर के पास स्थित उस शिवलिंग के दर्शन करने पहुँचे। दर्शन करते ही देवताओं के सारे पाप धुल गए। चूंकि नागचंडेश्वर नाम के दिव्य भक्त ने देवताओं को इस लिंग का मार्ग दिखाया था, इसलिए देवताओं ने प्रसन्न होकर उस शिवलिंग का नाम नागचंडेश्वर महादेव रख दिया।
श्री नागचंडेश्वर महादेव के दर्शन के लाभ (Significance & Benefits of Worshiping Shri Nagchandeshwar Mahadev)
- कालसर्प दोष और सर्प भय से मुक्ति: जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष या राहु-केतु के अशुभ प्रभाव हैं, उनके लिए यहाँ जलाभिषेक और पूजन करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
- अज्ञात भय और दुःस्वप्न से राहत: जिन्हें रात में डरावने सपने आते हैं या अकारण डर बना रहता है, Ujjain ke Nagchandeshwar Mahadev के दर्शन उनके मन को अभय प्रदान करते हैं।
- आरोग्य और यश की प्राप्ति: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहाँ नियमित दर्शन और पूजन करने से उत्तम स्वास्थ्य, शारीरिक ऊर्जा और समाज में यश-कीर्ति की प्राप्ति होती है।
- भूलवश हुए पापों का प्रायश्चित: जाने-अनजाने में धार्मिक नियमों के उल्लंघन से हुए पापों के प्रायश्चित के लिए नागचंडेश्वर महादेव की पूजा सर्वश्रेष्ठ मानी गई है।
दर्शन के लिए सबसे उत्तम और शुभ समय (Best Time to Visit)
Nagchandeshwar Mahadev Mandir में पूजा प्रतिदिन की जा सकती है, लेकिन शास्त्रों में कुछ तिथियों पर दर्शन का विशेष महत्व है:
- नागपंचमी का पावन पर्व, जिस दिन नागचंडेश्वर की विशेष पूजा और रुद्राभिषेक किया जाता है।
- श्रावण (सावन) का पवित्र महीना और अधिक मास (पुरुषोत्तम मास)।
- सोमवार का दिन, जो भगवान शिव की आराधना के लिए परम फलदायी है।
- महाशिवरात्रि, इस महापर्व पर पटनी बाजार की नागनाथ गली में स्थित इस प्राचीन मंदिर को भव्य रूप से सजाया जाता है और महाआरती का आयोजन होता है।
FAQ: Nagchandeshwar Mahadev Mandir उज्जैन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सवाल
प्रश्न 1: चौरासी महादेव यात्रा में Nagchandeshwar Mahadev का कौन सा स्थान है?
उत्तर: श्री नागचंडेश्वर महादेव उज्जैन की प्रसिद्ध चौरासी महादेव यात्रा श्रृंखला के 19वें (19th) क्रम पर आते हैं।
प्रश्न 2: Nagchandeshwar Mahadev का मंदिर उज्जैन में कहाँ स्थित है?
उत्तर: यह मंदिर उज्जैन के पटनी बाजार क्षेत्र में कमरी मार्ग / नागनाथ की गली के भीतर स्थित है।
प्रश्न 3: Nagchandeshwar Mahadev की पौराणिक कहानी क्या है?
उत्तर: इनकी पौराणिक कथा देवराज इंद्र और देवताओं द्वारा महाकाल वन आगमन पर शिव-निर्माल्या लांघने के भय से और ‘नागचंडेश्वर’ नामक दिव्य पुरुष द्वारा निष्पाप करने वाले शिवलिंग का मार्ग दिखाने से जुड़ी हुई है।
प्रश्न 4: इस मंदिर में दर्शन करने से मुख्य रूप से क्या लाभ मिलता है?
उत्तर: यहाँ दर्शन व पूजन करने से कालसर्प दोष दूर होता है, सर्प भय और दुःस्वप्नों से मुक्ति मिलती है, तथा जाने-अनजाने हुए सभी पापों का नाश होता है।
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दोस्तों हम 84 महादेव की सीरीज में आपके लिए हम उज्जैन में स्थित 84 Mahadev के मंदिर के बारे में बता रहे हैं जिसमे मंदिर की कथा और उन शिवलिंग की पूजा महत्व शामिल हैं। कृपया आप ऐसे ही हमारे द्वारा दी गयी जानकारी को अपने दोस्तों और परिवार जानो पहुचाये। आपको कोई और जानकारी चाहिए तो आप हम कमेंट या contact पेज के जरिये संपर्क कर सकते है।
Disclaimer: हमारे द्वारा दिए गए 84 महादेव सीरीज के 84 महादेव कथा, पूजन का महत्त्व कई इंटरनेट सोर्सेज के माध्यम से लिए गए है। लेकिन इंटरनेट और अन्य कई ग्रंथो यह लिस्ट अलग भी हो सकती हैं। अगर इसमें आपको कोई गलती लगाती है तो कृपया आप हमें हमारे ऑफिसियल ईमेल पर जरूर बताये।
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