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Indian Rivers Characteristic : भारत 4 मुख्य नदियों के जल की अलग – अलग विशेषता है।

Indian Rivers Characteristic : भारत एक ऐसा देश है जहाँ हर कुछ दुरी पर अलग भाषा, धर्म और संस्कृति के लोग आपको मिल जायेंगे। इस देश में आपको धर्म या भाषा ही नहीं बल्कि नदियाँ भी कई सैकड़ो में मिल जाएगी। शायद आपको पता नहीं होगा लेकिन हमारे देश भारत में लगभग 400 से भी ज्यादा नदियाँ हैं। इन मे से ज़्यादातर लोग कुछ ही नदियों के नाम जानते होंगे। जैसे गंगा, यमुना, सरस्वती, गोदावरी, ताप्ती, कावेरी और नर्मदा, कृष्णा, सतलुज, चम्बल आदि।

देश की सबसे बड़ी नदी है गंगा नदी जिसकी कुल लम्बाई है 2525 km और सबसे छोटी नदी है अरवारी नदी जिसकी कुल लम्बाई है मात्र 90 Km.

लेकिन दोस्तों आज हम आपको कुछ नदियों के जल की अलग अलग विशेषता Rivers Characteristic बताने जा रहे है। जो आपने शायद ही सुनी होगी। हम आपको इन विशेषता का सोर्स भी बताएँगे की कहा से हमें ये जानकारी मिली। आप भी उससे पढ़ कर हमें कमेंट में जरूर बताये की क्या हमने सारी जानकारी आपको सही सही दी है।

श्री गंगा नदी (Ganga Rivers Characteristic)

प्रोक्तं स्वादुसंतमत्यन्तरुच्यं पथ्यं पाक्यं पाचनं पापहरि
तृष्णामोहध्वंसनं चातिमेध्यं प्रज्ञां धत्ते वारि भागीरथीयम॥

भागीरथीजल (गंगाजल ) स्वादु (मधुर), अत्यन्त स्वच्छ, रुचिकर व पथ्य ( हितकर) होता है। यह भोजन द्रव्यों के उचित माना जाता है तथा पाचक होता है। गंगाजल पाप (दोष) का हरण करने वाला, तृष्णा (प्यास की व्याकुलता) व मोह (बेहोशी) को नष्ट करता है। यह मेधा (शास्त्र ग्रहण करने वाली बुद्धि) के लिए अति हितकारी है तथा प्रज्ञा (लोकव्यवहार- निष्णात बुद्धि) को बढ़ाता है।

सोर्स : (यह पद्य आयुर्वेदमहोदधि (सुषेण निघण्टु) के नेपाल से उपलब्ध हस्तलेख में ही मिला है)

श्री यमुना नदी (Yamuna Rivers Characteristic)

तस्मात्किञ्चिद गुरुतरं स्वादु पित्तपापहं परम्।
वातलं वह्निजनानं सूक्ष्मरं चयनाजलम् यमुनोदक्गुणाः

यमुनाजल पूर्वोक्त गंगाजल से कुछ गुरु (भारी), स्वादु व परम पिताहर होता है। यह वातकारक, जठराग्नि प्राप्त एवं रूक्ष होता है।

श्री नर्मदा नदी (Narmada Rivers Characteristic)

अतिस्वच्छं प्रकृतिं च शीतलं लघु लेखनम्।
पित्तश्लेष्मप्रशमनं नर्मदं सर्वरोगनुत्॥

नर्मदा का जल अति शुद्ध, शीतल, होता है। यह पित्त व कफ का शमन करने वाला तथा सर्वरोगहर माना जाता है।

श्री गोदावरी नदी (Godavari Rivers Characteristic)

कण्डुकुष्ठप्रशमनं वह्निसंदीपनं परम्।
पाचनं वात्पित्तघ्नं वारि गोदावरीभवम् ॥ गोदावरीयम्

गोदावरी नदी का जल कंडू (खुजली) एवं कुष्ठरोग का शमन करने वाला तथा अत्यधिक जठराग्नि प्राप्ति होता है। यह पवित्र व वातपित्तहर माना जाता है।

पित्तार्त्तिरक्तार्त्तिसमीरहरि पथ्यं परं दीपनपापहरि।
कुष्ठदिदुष्टामवदोषहारी गोदावरी त्रिशनिवारी ॥

गोदावरीजल पित्तरोग, रक्तपित्त व वातरोगों का निवारक होता है। यह अतीव पथ्य, दीपन व पापनाशक माना गया है। गोदावरी का जल कुष्ठ आदि दुष्ट रोगों का नाशक, त्रिदोषहर व तृषानिवारक होता है।

यह पद्म आयुर्वेदमहोदधि (सुषेण निघण्टु) के नेपाल से उपलब्ध हस्तलेख में ही मिला है।

श्री कावेरी नदी (Kaveri Rivers Characteristic)

कावेरीसलिलं पथ्यमामनं बलवर्णकृत्।
आग्नेयमतिशीतं च दद्रुकुष्ठविनाशनम् कावेरुडकम्।

कावेरी नदी का जल पथ, अम्नाक (आँव को पचाने वाला), बल सुन्दरता करने वाला और रंग निखारने वाला होता है यह आग्नेय (अग्निगुणयुक्त) होते हुए भी शीत प्रभाव वाला होता है तथा दाद, कुष्ठ व विष का निवारण करता है।

दोस्तों, इस उम्मीद है आपको इस आर्टिकल से Indian Rivers Characteristic की जानकारी जरुर मिली होगी। अगले आर्टिकल में हमने Indian Rivers Characteristic का वर्णन किया है। कृपया आप उसे भी जरूर रीड करे।

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Disclaimer: यह जानकारी इंटरनेट सोर्सेज के माध्यम से ली गयी है। जानकारी की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। धर्मकहानी का उद्देश्य सटीक सूचना आप तक पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता सावधानी पूर्वक पढ़ और समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इस जानकारी का उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी। अगर इसमें आपको कोई गलती लगाती है तो कृपया आप हमें हमारे ऑफिसियल ईमेल पर जरूर बताये।

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