Incredible Khajuraho Temples History : क्या आप जानते है खजुराहो के 25 मंदिरों का इतिहास

By | April 13, 2024
Khajuraho Temple History

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Khajuraho Temple : मध्यप्रदेश टूरिज़्म के लिए बहुत ही ख़ास है। मध्यप्रदेश के मंदिर देश ही नहीं दुनिया के लिए बहुत ही ऐतिहासिक महत्व रखते है। यहाँ का विश्व प्रसिद्ध खजुराहो मंदिर अपने आप में बहुत विशेष है, यह मंदिर अपनी कामुकता भरी मूर्तियों के लिए बहुत ही प्रसिद्ध है। यह मुर्तिया कामसूत्र से जुडी जानकारी का प्रतिक है। इस मंदिर की अद्भुत कलाकृति के कारण ही यह यूनेस्को की विश्व धरोहर की लिस्ट में शामिल है।

प्राचीन समय में खजुराहो को खजूरपुरा और खजूर वाहिका नाम से भी जाना जाता था। इन जगह पर कई सारे हिन्दू और जैन संप्रदाय से जुड़े मंदिर है। यहाँ की सबसे अद्भुत और आश्चर्यजनक बात है यहाँ के मंदिर जो मुड़े हुए पत्थरों से बने हुए है। यहाँ की मुर्तियां सम्भोग की अलग अलग कलाओ को मूर्तियों के रूप में उभारना एक अद्भुत और शानदार कला का नमूना है। इसलिए विश्व इतिहास से जुड़े कई इतिहास प्रेम यहाँ आते है और भारत की इस कला का ज्ञान पाने में लग जाते हैं।

Khajuraho Temple History in Hindi : खजुराहों मंदिर का इतिहास

मंदिर का नाम : खजुराहों
Name of Temple : Khajuraho
राज्य : मध्यप्रदेश
State : Madhya Pradesh
जिला : छतरपुर
District : Chhatarpur
निर्माण करने वाले राजा : चंदेला वंशीय चंद्रवर्मन
The King who Built : Chadela king Chandravarman
निर्माण में कितना समय लगा : लगभग 100 साल
Time took : Approx. 100
निर्माण काल : ई.स 950 और 1050
Construction Period : between 950 AD and 1050 AD.
कुल मंदिर : लगभग 85 मंदिर
Total Temple in Khajuraho : Approx. 85 Temples

Where is The Khajuraho Temple – खजुराहो मंदिर कहां है?

मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में एक छोटा सा गांव है खजुराहो। लेकिन अपने विश्व प्रसिद्ध धरोहर की वजह से टूरिस्टों की संख्या अधिक होती है इसलिए यहाँ आपको सारी जरूरत की वस्तुये मिल जाएगी।

Who built the Khajuraho temples? – खजुराहो मंदिर का निर्माण किसने करवाया था?

Khajuraho Temple को चन्देलवंशीय राजपूत शासकों ने बनवाया था। इन वंश के शासकों ने लगभग 10वीं से 13वीं सदी तक शासन किया था। इन मंदिरों को बनवाने में लगभग 100 साल का समय लगा। इस वंश के सबसे प्रमुख राजाओं के नाम है चंद्रवर्मन, यशोवर्धन, धंग, और परमादेव। खजुराहो और चंदेल वंश के संस्थापक चन्द्रवर्मन थे।

When was the construction of the Khajuraho temples done? – खजुराहो मंदिर का निर्माण कब करवाया था ?

भारतीय इतिहास के मध्यकाल में बुंदेलखंड में चंद्रवर्मन नाम के शासक का राज था। जो एक गुर्जर राजा थे। ये अपने आप को चंद्रवंशी मानते थे। 10वीं से 13वीं शताब्दी तक इन्ही चन्देलों का शासन था और इन्होने ने ही इन मंदिरों को 950 ई.स से 1050 ईसवीं के बीच बनवाया था। यहाँ पर हिन्दू धर्म और जैन संप्रदाय से जुड़े मंदिर है।

खजुराहो मंदिरो में भगवान शिव को समर्पित कंदरिया मंदिर बहुत ही प्रसिद्ध है और यह भव्य भी है। इन मंदिरो को बनवाने के बाद चन्देलों ने अपनी राजधानी महोबा को बना लिया था।

The story of the origin of the Chandela dynasty – चंदेलवंश की उत्पत्ति की कहानी

जैसा की आप सभी जानते है की Khajuraho temples का इतिहास लगभग 1000 साल से भी ज्यादा पुराना है। महोबा से पहले खजुराहो ही चंदेल राजवंश की राजधानी रहा है। हिंदू सम्राट पृथ्वीराज चौहान के दोस्त और उनके दरबारी कवी चंदरबरदाई ने पृथ्वीराज रासो में चंदेल वंश की उत्पत्ति बहुत भी बढ़िया कहानी बताई है। उन्होंने ने बताया की काशी के राज पंडित की एक पुत्री थी जजों बहुत ही सुन्दर थी। एक समय की बात है वो कमल के फूलों से सजे तालाब नहा रही थी उसी रात चंद्रदेव उसकी सुंदरता पर मोहित हो गए।

उसकी सुंदरता में आकर्षित चंद्र ने मनुष्य रूप लेकर उसका हरण कर लिया। हरण करने के कुछ दिन बाद चंद्र को अपनी गलती का एहसास हो गया तो उन्होंने हेमवती को फिर से उनके पिता के घर एक रात छोड़ दिया। लेकिन छोड़ने से पहले ही हेमवती ने चंद्र को बताया की वो गर्भवती है।

चंद्र ने उसे ख़ुशी से आशीर्वाद दिया की उसके गर्भ से पैदा होने वाला एक बालक होगा जो एक बहुत ही निर्भय और शक्तिशाली व्यक्ति होगा और उसी का एक महान वंश बनेगा उसके द्वारा एक महा यज्ञ करने से आपका कल्याण होगा। लेकिन उससे पहले चंद्र ने उसे बताया की तुम यहाँ से दूर खजूरपुरा चले जाए।

अपने पुत्र को उसने बहुत ही प्यार को संस्कारो के साथ पाला और उसका नाम रखा चंद्रवर्मन। वो भी अपनी माता को उसकी तरह प्रेम करता था। युवा अवस्था में आते उसने अपनी छोटी से सेना से कई आस पास के राजाओ को हराना शुरू कर दिया। और जल्दी ही हारे हुए राजाओ के राज्य की मदद से एक राज्य स्थापित किया।

कुछ समाया बाद हेमवती को चंद्र की बात याद आयी और उसने अपने पुत्र को यज्ञ सलाह दी। अपनी माँ की सलाह मानकर उसने यज्ञ से पहले बहुत ही सुन्दर कलाकृति वाले 85 मंदिर बनवाये। उसके बाद यज्ञ किया।

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Architecture And Structure of Khajuraho Templeखजुराहो मंदिर की वास्तुकला और संरचना

भारतीय कलाकृति का सबसे नायब और कलाकृती का उत्कृष्ट नमूने है खजुराहो में बने मंदिर। इन मंदिरों पर बनी मूर्तियों की भाव देखकर आपको आज भी ऐसा प्रतीत होता है जैसे ये आपस में बात कर रही हो। कामुकता भरी इन मूर्तियों पर विशेषज्ञ और इतिहासकार अलग अलग राय रखते है। कुछ इन्हे मध्यकाल की कमजोर नैतिकता बताते है तो कुछ इन्हे मध्यकाल में होने वाले खुले विचारो का वर्णन।

कुछ लोग इसके पीछे का तर्क देते है की कामशास्त्र में वर्णित रचनात्मक आसनों का प्रदर्शन। इन मूर्तियों को अगर गौर से देखा जाय तो आप कामुकता के दौरान होने वाले आनंद के भाव को दर्शाते है।

Khajuraho Temple की ऐतिहासिक मंदिरो में बनी मूर्तियां ज्यादातर लाल बलुआ पत्थर का इस्तेमाल हुआ है। Khajuraho Temple में बनी कुछ मूर्तियों को बनाने में ग्रेनाइट के पत्थर का भी इस्तेमाल होता है। इसमें से कुछ प्रसिद्ध मंदिर जैसे ललगुआं महादेव, ब्रम्हदेव मंदिर और चौसठ योगिनी मंदिर ग्रेनाइट के बने है।

Khajuraho Temple की वास्तुकला और संरचना मध्यकालीन भारतीय मंदिर वास्तुकला के अद्वितीय उदाहरणों में से एक हैं, विशेषकर नागर शैली का हिस्सा हैं। यहां इस वास्तुकला और संरचना के मुख्य विशेषताएँ हैं:

  1. लेआउट:
    • Khajuraho Temple को तीन समूहों में बाँटा गया है: पश्चिमी समूह, पूर्वी समूह, और दक्षिणी समूह। विशेषकर, पश्चिमी समूह सबसे प्रसिद्ध और आकर्षक है।
  2. वास्तुकला शैलियाँ:
    • मंदिर नागर और द्रविड़ वास्तुकला शैलियों का मिश्रण प्रदर्शित करते हैं, उत्तरी और दक्षिणी भारतीय मंदिर वास्तुकला का संघटित प्रतीक हैं।
  3. शिखर (टावर):
    • मुख्य मंदिर में सामान्यत: एक ऊँचा और सुसज्जित शिखर या टावर होती है। शिखर गर्भगृह के ऊपर उठती है और यह नागर शैली के मंदिरों का प्रमुख विशेषता है।
  4. मंडप (हॉल):
    • मंदिर में सामान्यत: एक मंडप होता है, जो कि एक हॉल या पैविलियन होता है, जिसमें सुसज्जित स्तंभों के साथ अक्सर नृत्याभिनय होता है। मंडप धार्मिक सभा और आराधना के लिए एक स्थान का कार्य करता है।
  5. गर्भगृह (सैंक्टम सैंक्टोरम):
    • अंदर का गर्भगृह मुख्य देवता की मूर्ति को धारण करता है। गर्भगृह एक पवित्र स्थान है और मंदिर का केंद्रीय बिंदु है।
  6. शृंगार विग्रह:
    • कुछ मंदिरों की बाहरी दीवारों पर जटिल और स्पष्ट शृंगार विग्रह होती हैं। ये विग्रह न केवल शृंगारी होती हैं, बल्कि जीवन, प्रेम और पुरुष और स्त्री सिद्धांतों के बीच संबंध की प्रतीक होती हैं।
  7. मूर्तिकला और नक्काशी:
    • मंदिरों को उनकी अद्वितीय मूर्तिकला और जटिल नक्काशी के लिए प्रसिद्ध किया गया है। यह नक्काशी जीवन, पौराणिक कथाएँ, देवताओं, और दिव्य प्रतिमाएँ दर्शाती है।
  8. मूर्तियाँ (प्रतिमाएँ):
    • मंदिर में हिन्दू देवताओं, जैसे कि विष्णु, शिव, और भगवती के कई प्रतिमाएँ होती हैं।
  9. जैन मंदिर:
    • खजुराहो में कुछ जैन मंदिर भी हैं, जो अपनी वास्तुकला की सुंदरता और जैन चित्रशाला के लिए प्रसिद्ध हैं।
  10. जल सागर:
    • कुछ मंदिरों के पास जल सागर या जल संग्रहण कुंड होते हैं, जो की उदाहरण के रूप में दिखने के साथ-साथ प्राथमिक और प्रतीकात्मक उद्देश्यों के लिए होते हैं।
  11. यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल:
    • 1986 में, खजुराहो समूह को धरोहर के रूप में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में घोषित किया गया, इससे इसकी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्वपूर्णता को मान्यता प्राप्त हुई।

खजुराहो मंदिर उनकी वास्तुकला की बड़े पैम्बर में, उत्कृष्ट कलात्मकता, और आध्यात्मिक और सौंदर्यिक तत्त्वों के संघटन के लिए मशहूर हैं। वे मध्यकालीन भारत की धनी सांस्कृतिक और कलात्मक धरोहर की दिग्गजों के रूप में खड़े हैं।

How many temples are there in Khajuraho Templeखजुराहो में कितने मंदिर है ?

आपको जाने में एक आश्चर्य होगा की 12 – 13 शताब्दी तक यहाँ कुल 85 मंदिर थे। लेकिन समय की मार और कुछ अनदेखी की वजह से यहाँ सिर्फ 25 – 30 मंदिर ही बचे होंगे, जो खजुराहो क्षेत्र के 20 कम फैले होंगे।

Khajuraho Temple खजुराहो के मंदिरों की एक सामान्य सूची में 25 मंदिर शामिल हो सकते हैं। यहां खजुराहो के कुछ प्रमुख मंदिरों की सूची है:

क्रमांकआधुनिक मंदिर का नामधर्मदेवतापूरा किया गया (सन)विवरण
1चौसठ योगिनीहिन्दूधर्मदेवी, 64 योगिनी885
2लालगुआँ महादेवहिन्दूधर्मशिव900
3ब्रह्मा मंदिरहिन्दूधर्मशिव925
4लक्ष्मणहिन्दूधर्मवैकुण्ठ विष्णु939यह सबसे प्रसिद्ध मंदिर है और खजुराहो का सबसे बड़ा मंदिर माना जाता है। इसमें विष्णु की मूर्ति स्थित है और इसे यज्ञवराह मंदिर भी कहा जाता है।
5वराहहिन्दूधर्मवराह950
6पार्श्वनाथजैनधर्मपार्श्वनाथ954
7घंटैजैनधर्मआदिनाथ960
8महिषासुरमर्दिनीहिन्दूधर्मपार्वती995
9विश्वनाथहिन्दूधर्मशिव999
10मतंगेश्वरहिन्दूधर्मशिव920
11विष्णु-गरुड़हिन्दूधर्मविष्णु1000
12बीजामंडल मंदिर के शेषहिन्दूधर्मशिव1000
13गणेशहिन्दूधर्मशिव1000
14जगदंबीहिन्दूधर्मदेवी जगदंबी1023
15चित्रगुप्तहिन्दूधर्मचित्रगुप्त1023
16आदिनाथ मंदिरजैनधर्मआदिनाथ1027
17शांतिनाथ मंदिरजैनधर्मशांतिनाथ1027
18कंदरिया महादेव (सबसे बड़ा मंदिर)हिन्दूधर्मशिव999
19वामनहिन्दूधर्मवामन1062
20जवेरीहिन्दूधर्मशिव1090
21चतुर्भुजहिन्दूधर्मविष्णु1100
22दुलदेव (दुलदेवा)हिन्दूधर्मशिव1125
23मुरलीमनोहरहिन्दूधर्मकृष्ण यह मंदिर लक्ष्मण मंदिर के पास स्थित है और इसकी विशेषता उसकी श्रृंगारी स्थानीय आकृति और अद्वितीय मूर्तियों में है।
24 हनुमानहिन्दूधर्महनुमान
25 सूर्य मंदिर :हिन्दूधर्मसूर्यदेव
26 पार्वती मंदिरहिन्दूधर्ममाँ पार्वती और माँ गंगा
27 नंदी मंदिरहिन्दूधर्मशिव और नंदी

खजुराहो जाने का सबसे अच्छा समय – Best time to visit Khajuraho Temple

खजुराहो का टूर करने के लिए सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च तक है। इस समय वर्षा की अधिक संभावना होती है और ठंडी मौसम के कारण यहां का आनंद लेना बहुत अच्छा होता है। खासकर, नवम्बर से फरवरी तक के महीनों में खजुराहो का मौसम सुहावना रहता है, जब तापमान उच्चतम 25-30 डिग्री सेल्सियस होता है और ठंडक की आवश्यकता होती है।

इस समय में, Khajuraho Temple की सुंदरता को पूरी तरह से उभारने का अवसर होता है और पर्यटक शांतिपूर्ण और प्राकृतिक सौंदर्य से भरी इस स्थल का आनंद लेते हैं।

हालांकि, अगर आप गरमी और उच्च तापमान को पसंद करते हैं, तो अप्रैल से जून तक का समय भी ठीक हो सकता है। इस समय खजुराहो में ऊष्मा बढ़ती है और बारिश की उम्मीद होती है।

यदि आप खजुराहो का दौरा करने का निर्णय कर रहे हैं, तो स्थानीय मौसम पूर्वानुमान और तत्परता की जाँच करना सुनिश्चित करें और अपनी योजना इस आधार पर बनाएं।

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How to Reach Khajuraho Templeखजुराहो कैसे पहुंचे

खजुराहो पहुंचने के लिए कई तरीके हो सकते हैं। यहां कुछ सामान्य तरीके हैं:

हवाई मार्ग: नगरीय क्षेत्र से: खजुराहो के पास अपना हवाई अड्डा है, जो कि खजुराहो विमानस्थल (Khajuraho Airport) के रूप में जाना जाता है। कई आधारभूत नगरों से नियमित उड़ानें उपलब्ध होती हैं।
अंतर्राष्ट्रीय यात्रा से: नजदीकी अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट से आकर्षक की स्थिति के आधार पर आपको खजुराहो तक एक सीधी उड़ान से जा सकता है।
रेलवे मार्ग: खजुराहो के पास एक छोटा स्टेशन है जो कि बहुत से मुख्य शहरों से सीधी रेल सेवा से जुड़ा हुआ है।
सड़क मार्ग: खजुराहो को अच्छी तरह से सड़क से जोड़ा जा सकता है। बहुत से राजमार्ग और राष्ट्रीय राजमार्ग खजुराहो से होकर गुजरते हैं, जिनसे यहां पहुंचना सुरक्षित है।
बस सेवा: कई राज्य और प्राइवेट बस सेवाएं खजुराहो से उपलब्ध हैं, जो नगरीय क्षेत्रों से इस शहर तक यात्रा करती हैं।
खजुराहो से अन्य स्थलों के साथ संयुक्त यात्रा।

आप भी खजुराहो को अन्य प्रमुख स्थलों के साथ संयुक्त यात्रा के लिए टूर पैकेजों का चयन कर सकते हैं जो विभिन्न पर्यटन आगंतुक स्थलों को शामिल करते हैं।

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दोस्तों हमने Incredible Khajuraho Temples मंदिर के बारे में बता रहे हैं जिसमे मंदिर की कथा और उनकी विशषताएँ शामिल हैं। कृपया आप ऐसे ही हमारे द्वारा दी गयी जानकारी को अपने दोस्तों और परिवार जानो पहुचाये। आपको कोई और जानकारी चाहिए तो आप हम कमेंट या contact पेज के जरिये संपर्क कर सकते है।

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