Maa Lalita Aarti: हर वर्ष माघ शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को माँ ललिता त्रिपुरसुंदरी जयंती मनाई जाती है। यह तिथि श्रीविद्या परंपरा में विशेष महत्व रखती है, क्योंकि इसी दिन माँ ललिता का प्राकट्य हुआ माना जाता है। वर्ष 2026 में माँ ललिता जयंती 1 फरवरी, रविवार को मनाई जाएगी।
माँ ललिता त्रिपुरसुंदरी को आदिशक्ति का सौम्य और पूर्ण स्वरूप माना जाता है। वे केवल सौंदर्य की देवी नहीं हैं, बल्कि ज्ञान, चेतना और ब्रह्मांडीय शक्ति की अधिष्ठात्री हैं। श्रीचक्र में विराजमान माँ ललिता सम्पूर्ण सृष्टि का संचालन करती हैं और साधक को भोग तथा मोक्ष – दोनों का मार्ग दिखाती हैं।
ललिता जयंती के दिन साधक विशेष रूप से श्रीचक्र पूजन, ध्यान, जप और आरती के माध्यम से माँ की आराधना करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन सच्चे भाव से की गई पूजा से जीवन के सूक्ष्म और स्थूल दोनों स्तरों पर सकारात्मक परिवर्तन आता है।
इसी पावन अवसर पर माँ ललिता त्रिपुरसुंदरी की आरती का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
Maa Lalita Aarti: माँ ललिता की आरती
श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी!
राजेश्वरी जय नमो नम:!!
करुणामयी सकल अघ हारिणी!
अमृत वर्षिणी नमो नम:!!
जय शरणं वरणं नमो नम:
श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी…!
अशुभ विनाशिनी, सब सुखदायिनी!
खलदल नाशिनी नमो नम:!!
भंडासुर वध कारिणी जय मां!
करुणा कलिते नमो नम:!!
जय शरणं वरणं नमो नम:
श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी…!
भव भय हारिणी कष्ट निवारिणी!
शरण गति दो नमो नम:!!
शिव भामिनी साधक मन हारिणी!
आदि शक्ति जय नमो नम:!!
जय शरणं वरणं नमो नम:!
श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी…!!
जय त्रिपुर सुंदरी नमो नम:!
जय राजेश्वरी जय नमो नम:!!
जय ललितेश्वरी जय नमो नम:!
जय अमृत वर्षिणी नमो नम:!!
जय करुणा कलिते नमो नम:!
श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी…!
माँ ललिता त्रिपुरसुंदरी की आरती केवल एक स्तुति नहीं है, बल्कि साधक के मन और चेतना को माँ के श्रीविद्या स्वरूप से जोड़ने का माध्यम है। ललिता जयंती के पावन दिन आरती के शब्दों में डूबी भक्ति, मन के विकारों को शांत करती है और भीतर स्थिरता का भाव जगाती है।
ऐसा माना जाता है कि जब आरती श्रद्धा और एकाग्रता के साथ की जाती है, तो माँ ललिता साधक को सही दिशा, विवेक और आंतरिक बल प्रदान करती हैं। जीवन की उलझनों के बीच यह आरती एक ऐसा क्षण बन जाती है, जहाँ मन रुकता है और चेतना माँ के चरणों में टिक जाती है।
माँ ललिता त्रिपुरसुंदरी की कृपा से सभी के जीवन में शांति, स्पष्टता और मंगल भाव बना रहे, यही इस जयंती का सच्चा उद्देश्य है।




