Aaj ki tithi

Aaj Ki Tithi: 4 फरवरी 2026, पंचांग, मुहूर्त और चौघड़िया

आज की तिथि: 4 फरवरी 2026
आज 4 फरवरी 2026, बुधवार का दिन है। आज फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। हालांकि, धार्मिक गणना के अनुसार आज गणेश जयंती (तिलकुंद चतुर्थी) का पावन पर्व मनाया जा रहा है। बुधवार और गणेश चतुर्थी का यह संयोग अत्यंत मंगलकारी है, जो विघ्नों के नाश और कार्यों की सफलता के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

Aaj Ki Tithi : आज की मुख्य तिथियाँ

यह पंचांग गणना मध्य भारत (उज्जैन/इंदौर) के मानक समय पर आधारित है। आपके शहर के सूर्योदय के अनुसार शुभ और अशुभ समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।

आज का पंचांग

नीचे Aaj Ki Tithi और आज के पंचांग से जुड़े सभी महत्वपूर्ण समय और मुहूर्त दिए गए हैं।

अंगविवरण
तिथिफाल्गुन कृष्ण चतुर्थी (शाम 05:32 PM तक, फिर पंचमी)
वारबुधवार
नक्षत्रपूर्वा फाल्गुनी (दोपहर 03:01 PM तक, फिर उत्तरा फाल्गुनी)
योगशोभन (रात्रि 12:05 AM, 5 फर. तक, फिर अतिगण्ड)
करणविष्टि / भद्रा (सुबह 07:05 AM तक), फिर बव

माह, पक्ष और संवत

तत्वविवरण
माहफाल्गुन
पक्षकृष्ण
ऋतुशिशिर
विक्रम संवत2082
कलियुग संवत5126

तिथि का समय

तिथिसमय
वर्तमान तिथि (चतुर्थी)03 फरवरी, 08:34 PM से 04 फरवरी, 05:32 PM तक
अगली तिथि (पंचमी)04 फरवरी, 05:32 PM से 05 फरवरी, 02:59 PM तक

व्रत / पर्व और विशेष जानकारी

विवरणजानकारी
व्रत / पर्वगणेश जयंती / तिलकुंद चतुर्थी
विशेष मान्यता1. आज भगवान गणेश का जन्मोत्सव है, तिल से बने व्यंजनों का भोग लगाना शुभ है।
2. बुधवार और चतुर्थी का संयोग ‘बुध-चतुर्थी’ योग बनाता है, जो बुद्धि वृद्धि के लिए उत्तम है।
अग्नि / शिव वासअग्नि वास आकाश में (शाम 05:32 PM तक) है। शिव वास सभा में (शाम 05:32 PM तक) है।

सूर्य और चंद्र संबंधी विवरण (Local Time)

सूचना: नीचे दिए गए समय स्थान के अनुसार बदलते हैं।
तत्वसमय (अनुमानित)
सूर्योदय07:11
सूर्यास्त17:58
चंद्रोदय20:53
चंद्रास्त09:30

चंद्र संबंधित विवरण

तत्वविवरण
चंद्र स्थितिसिंह राशि में (रात्रि 09:12 PM तक), फिर कन्या राशि में प्रवेश

शुभ मुहूर्त

मुहूर्तसमय
अभिजित मुहूर्तआज उपलब्ध नहीं है (बुधवार होने के कारण)
ब्रह्म मुहूर्त05:25 AM – 06:18 AM
अमृत कालसुबह 08:44 AM – 10:16 AM

अशुभ काल

कालसमय
राहुकाल12:34 PM – 01:55 PM
यमगण्ड काल08:31 AM – 09:52 AM
गुलिक काल11:13 AM – 12:34 PM

दिन का चौघड़िया

चौघड़ियासमयफल
लाभ07:11 AM – 08:31 AMशुभ
अमृत08:31 AM – 09:52 AMबहुत शुभ
काल09:52 AM – 11:13 AMअशुभ
शुभ11:13 AM – 12:34 PMशुभ
रोग12:34 PM – 01:55 PMअशुभ
उद्वेग01:55 PM – 03:16 PMअशुभ
चर03:16 PM – 04:37 PMसामान्य
लाभ04:37 PM – 05:58 PMशुभ

रात का चौघड़िया

चौघड़ियासमयफल
रोग05:58 PM – 07:37 PMअशुभ
काल07:37 PM – 09:17 PMअशुभ
लाभ09:17 PM – 10:57 PMशुभ
उद्वेग10:57 PM – 12:37 AMअशुभ
शुभ12:37 AM – 02:17 AMशुभ
अमृत02:17 AM – 03:56 AMबहुत शुभ
चर03:56 AM – 05:36 AMसामान्य
रोग05:36 AM – 07:16 AMअशुभ

Preview

सूचना:
चौघड़िया का समय सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर तय होता है,
इसलिए यह हर शहर में अलग-अलग हो सकता है।
अपने स्थान के अनुसार समय देखें।

संकष्टी चतुर्थी का महत्व: आज शाम को चतुर्थी तिथि लगने के कारण भगवान गणेश के ‘संकष्टी चतुर्थी’ का व्रत रखा जाएगा। आज रात 08:53 PM पर चंद्रोदय होगा, जिसके बाद अर्घ्य देकर व्रत खोला जा सकता है।

राशि परिवर्तन: आज चंद्रमा अपनी राशि बदल रहे हैं। रात्रि 09:12 PM के बाद चंद्रमा सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में चले जाएंगे, जिससे कई राशियों के लिए मानसिक स्थिति में बदलाव आएगा।

पंचांग देखने की ज़रूरत क्यों पड़ती है?

पंचांग दिन की धार्मिक और ज्योतिषीय स्थिति बताता है। इसी से यह समझ आता है कि पूजा, व्रत या कोई शुभ कार्य किस समय करना उचित रहेगा। ग्रंथों में भी पंचांग को दिनचर्या का मार्गदर्शक माना गया है।

तिथि और तारीख एक जैसी क्यों नहीं होती?

तारीख सूर्य की गणना से बनती है, जबकि तिथि चंद्रमा की गति पर आधारित होती है। इसी कारण कई बार एक ही तारीख में तिथि बदल जाती है। धार्मिक कार्य हमेशा तिथि देखकर ही किए जाते हैं।

क्या पंचांग पूरे भारत में एक-सा होता है?

पंचांग के मुख्य तत्व जैसे तिथि, नक्षत्र और योग लगभग समान रहते हैं। लेकिन सूर्योदय, सूर्यास्त, राहुकाल और चौघड़िया जैसे समय स्थान के अनुसार बदल सकते हैं। इसीलिए स्थानीय समय देखना ज़रूरी माना जाता है।

राहुकाल और चौघड़िया क्यों देखे जाते हैं?

इन समयों को दिन की सावधानी और अनुकूलता समझने के लिए देखा जाता है। कुछ काल नए कार्य के लिए ठीक माने जाते हैं, तो कुछ में रुकना बेहतर होता है। इससे अनावश्यक नुकसान से बचने में मदद मिलती है।

व्रत और पर्व का सही समय कैसे तय होता है?

व्रत और पर्व की मान्यता तिथि और पंचांग गणना पर निर्भर करती है। इसी के अनुसार व्रत रखना, पारणा करना और पूजा का समय तय किया जाता है। गलत समय पर किया गया व्रत पूर्ण फल नहीं देता।

क्या रोज़ पंचांग देखना ज़रूरी है?

रोज़ पंचांग देखना अनिवार्य नहीं है, लेकिन यह दिन को सही ढंग से समझने में मदद करता है। खासतौर पर व्रत, यात्रा या कोई महत्वपूर्ण निर्णय हो तो पंचांग देखना लाभकारी माना गया है।

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