Ramayan ki Aarti

Ramayan ki Aarti 2026 – श्री रामायण जी की आरती

Ramayan Ki Aarti : सनातन धर्म की उन पवित्र आरतियों में से एक है, जो रामायण पाठ, श्रीरामचरितमानस पाठ और सुंदरकांड के समापन पर श्रद्धापूर्वक गाई जाती है। मान्यता है कि श्री रामायण जी की आरती करने से पाठ का पूर्ण फल प्राप्त होता है तथा प्रभु श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और भक्त हनुमान की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

रामायण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि धर्म, मर्यादा, कर्तव्य और आदर्श जीवन का दिव्य मार्गदर्शक है। इसलिए रामायण पाठ के अंत में आरती करके भक्त भगवान श्रीराम के प्रति अपनी श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करते हैं। आइए जानते हैं Ramayan Ki Aarti Hindi Lyrics, इसका महत्व, लाभ और आरती के बाद किए जाने वाले नियम।

Ramayan Ki Aarti – श्री रामायण जी की संपूर्ण आरती

आरती श्री रामायण जी की।
कीरति कलित ललित सिय पी की॥

गावत ब्रहमादिक मुनि नारद।
बाल्मीकि बिग्यान बिसारद॥
शुक सनकादिक शेष अरु शारद।
बरनि पवनसुत कीरति नीकी॥
आरती श्री रामायण जी की॥

गावत बेद पुरान अष्टदस।
छओं शास्त्र सब ग्रंथन को रस॥
मुनि जन धन संतन को सरबस।
सार अंश सम्मत सब ही की॥
आरती श्री रामायण जी की॥

गावत संतत शंभु भवानी।
अरु घटसंभव मुनि बिग्यानी॥
ब्यास आदि कबिबर्ज बखानी।
कागभुशुंडि गरुड़ के ही की॥
आरती श्री रामायण जी की॥

कलिमल हरनि बिषय रस फीकी।
सुभग सिंगार मुक्ति जुबती की॥
दलनि रोग भव मूरि अमी की।
तात मातु सब बिधि तुलसी की॥
आरती श्री रामायण जी की॥
कीरति कलित ललित सिय पी की॥

Ramayan Ki Aarti Lyrics in English

Aarti Shri Ramayan Ji Ki।
Kirti Kalit Lalit Siya Pi Ki॥

Gaavat Brahmadik Muni Narad।
Valmiki Vigyan Bisarad॥
Shuk Sanakadik Shesh Aru Sharad।
Barani Pavansut Kirti Neeki॥
Aarti Shri Ramayan Ji Ki॥

Gaavat Ved Puran Ashtadas।
Chhaon Shastra Sab Granthan Ko Ras॥
Munijan Dhan Santan Ko Sarbas।
Saar Ansh Sammat Sab Hi Ki॥
Aarti Shri Ramayan Ji Ki॥

Gaavat Santat Shambhu Bhavani।
Aru Ghatasambhav Muni Vigyani॥
Vyas Aadi Kavivar Bakhani।
Kagbhushundi Garud Ke Hi Ki॥
Aarti Shri Ramayan Ji Ki॥

Kalimala Harani Vishay Ras Phiki।
Subhag Singar Mukti Jubati Ki॥
Dalan Rog Bhav Moori Ami Ki।
Taat Maat Sab Bidhi Tulsi Ki॥
Aarti Shri Ramayan Ji Ki।
Kirti Kalit Lalit Siya Pi Ki॥

Ramayan ki Aarti – रामायण जी की आरती का महत्व क्या है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आरती करने से पूजा में अनजाने में हुई कोई भी भूल-चूक क्षमा हो जाती है। रामायण जी की आरती का विशेष महत्व इस प्रकार है:

  • नकारात्मकता का नाश: इस आरती के स्वर और कपूर-दीपक की लौ से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मकता का संचार होता है।
  • पापों से मुक्ति: आरती की पंक्तियों में स्पष्ट कहा गया है कि यह ‘कलिमल हरन’ है, यानी कलयुग के पापों और मानसिक विकारों को नष्ट करने वाली है।
  • मानसिक शांति: रामायण जी की आरती गाने या सुनने से मन शांत होता है, तनाव दूर होता है और जीवन में सही निर्णय लेने की सद्बुद्धि आती है।

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रामायण जी की आरती की रचना किसने की है?

इस परम पावन आरती की रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने की है।

तुलसीदास जी ने ही अवधी भाषा में ‘श्रीरामचरितमानस’ जैसे महान ग्रंथ की रचना की। इस आरती में उन्होंने रामायण की महिमा का गान किया है और बताया है कि यह पवित्र ग्रंथ साक्षात वेदों, पुराणों और शास्त्रों का निचोड़ (रस) है, जिसे स्वयं ब्रह्मा, नारद, और वाल्मीकि जैसे ऋषि-मुनि गाते हैं।

Ramayan Ki Aarti Ke Baad Kya Karna Chahiye? – आरती के बाद क्या करना चाहिए?

आरती संपन्न होने के बाद कुछ विशेष क्रियाएं की जाती हैं, जिससे पूजा का पूरा पुण्य फल प्राप्त होता है:

1. आरती की लौ लेना (आरती लेना)

आरती समाप्त होने के बाद, अपने दोनों हाथों को दीपक या कपूर की लौ के ऊपर से घुमाकर अपने माथे और आँखों पर लगाएं। ऐसा माना जाता है कि आरती की लौ में ईश्वर की दिव्य शक्ति समाहित हो जाती है।

2. पुष्पांजलि और मंत्र पुष्पांजलि

भगवान और रामायण ग्रंथ पर फूल और अक्षत (चावल) अर्पित करें। यदि आपको ‘मंत्र पुष्पांजलि’ याद है तो उसका पाठ करें, अन्यथा मन ही मन प्रभु का ध्यान करते हुए फूल अर्पित कर दें।

3. प्रदक्षिणा (परिक्रमा)

आरती के बाद अपने ही स्थान पर क्लॉकवाइज (घड़ी की सुई की दिशा में) तीन बार गोल घूमें। इसे प्रदक्षिणा कहते हैं, जो ईश्वर के प्रति संपूर्ण समर्पण का प्रतीक है।

4. चरणामृत और प्रसाद वितरण

आरती के बाद भगवान को लगाए गए भोग (प्रसाद) और चरणामृत को सबसे पहले स्वयं ग्रहण करें और फिर उपस्थित सभी भक्तों में श्रद्धापूर्वक वितरित करें।

5. साष्टांग प्रणाम और क्षमा याचना

सबसे अंत में रामायण जी और प्रभु श्री राम के चरणों में झुककर प्रणाम करें। पूजा या पाठ के दौरान जाने-अनजाने में हुई किसी भी गलती के लिए हाथ जोड़कर क्षमा याचना करें।

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निष्कर्ष

Ramayan Ki Aarti केवल एक आरती नहीं, बल्कि प्रभु श्रीराम के आदर्शों, मर्यादाओं और दिव्य चरित्र के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का माध्यम है। रामायण पाठ, सुंदरकांड या किसी भी रामभक्ति अनुष्ठान के अंत में श्री रामायण जी की आरती अवश्य करनी चाहिए। इससे पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है, मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है।

यदि आपके घर में रामायण पाठ का आयोजन हो रहा है, तो इस पावन आरती को पूरे श्रद्धा भाव से गाएँ और प्रभु श्रीराम की कृपा प्राप्त करें।

॥ जय श्री राम ॥

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