Aaj ki tithi

Aaj Ki Tithi: 4 फरवरी 2026, पंचांग, मुहूर्त और चौघड़िया

आज 17 फरवरी 2026, मंगलवार का दिन है। आज फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है। इसे ‘फाल्गुन अमावस्या’ कहा जाता है, जो पितरों के तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है। मंगलवार के दिन अमावस्या होने से इसे भौमवती अमावस्या का विशेष संयोग भी मिल रहा है।

Aaj Ki Tithi : आज की मुख्य तिथियाँ

यह पंचांग गणना मध्य भारत (उज्जैन/इंदौर) के मानक समय पर आधारित है। आपके शहर के सूर्योदय के अनुसार शुभ और अशुभ समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।

आज का पंचांग

नीचे Aaj Ki Tithi और आज के पंचांग से जुड़े सभी महत्वपूर्ण समय और मुहूर्त दिए गए हैं।

अंगविवरण
तिथिफाल्गुन कृष्ण अमावस्या (दोपहर 03:00 PM तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा)
वारमंगलवार
नक्षत्रशतभिषा (शाम 05:27 PM तक, फिर पूर्व भाद्रपद)
योगपरिघ (दोपहर 12:03 PM तक), फिर शिव
करणनाग (दोपहर 03:00 PM तक), फिर किस्तुघ्न

माह, पक्ष और संवत

तत्वविवरण
माहफाल्गुन
पक्षकृष्ण (दोपहर 03:00 PM तक), फिर शुक्ल प्रारंभ
ऋतुशिशिर
विक्रम संवत2082
कलियुग संवत5126

तिथि का समय

तिथिसमय
वर्तमान तिथि (अमावस्या)16 फरवरी, 06:14 PM से 17 फरवरी, 03:00 PM तक
अगली तिथि (प्रतिपदा)17 फरवरी, 03:00 PM से 18 फरवरी, 11:34 AM तक

व्रत / पर्व और विशेष जानकारी

विवरणजानकारी
व्रत / पर्वफाल्गुन अमावस्या / भौमवती अमावस्या
विशेष मान्यता1. पितरों की शांति के लिए आज तर्पण और दान का विशेष महत्व है।
2. आज अमावस्या दोपहर 3 बजे समाप्त हो रही है, अतः श्राद्ध कर्म दोपहर से पहले करना उचित है।
अग्नि / शिव वासअग्नि वास पृथ्वी पर (दोपहर 03:00 PM तक) है। शिव वास श्मशान में (पूरी रात) है।

सूर्य और चंद्र संबंधी विवरण (Local Time)

सूचना: नीचे दिए गए समय स्थान के अनुसार बदलते हैं।
तत्वसमय (अनुमानित)
सूर्योदय06:59
सूर्यास्त18:11
चंद्रोदय07:11
चंद्रास्त18:29

चंद्र संबंधित विवरण

तत्वविवरण
चंद्र स्थितिकुंभ राशि में संचरण

शुभ मुहूर्त

मुहूर्तसमय
अभिजित मुहूर्त12:12 PM – 12:57 PM
ब्रह्म मुहूर्त05:15 AM – 06:07 AM
अमृत कालसुबह 10:28 AM – 11:57 AM

अशुभ काल

कालसमय
राहुकाल03:22 PM – 04:47 PM
यमगण्ड काल09:47 AM – 11:13 AM
गुलिक काल12:35 PM – 01:58 PM

दिन का चौघड़िया

चौघड़ियासमयफल
रोग06:59 AM – 08:23 AMअशुभ
उद्वेग08:23 AM – 09:47 AMअशुभ
चर09:47 AM – 11:11 AMसामान्य
लाभ11:11 AM – 12:35 PMशुभ
अमृत12:35 PM – 01:58 PMबहुत शुभ
काल01:58 PM – 03:22 PMअशुभ
शुभ03:22 PM – 04:47 PMशुभ
रोग04:47 PM – 06:11 PMअशुभ

रात का चौघड़िया

चौघड़ियासमयफल
काल06:11 PM – 07:47 PMअशुभ
शुभ07:47 PM – 09:23 PMशुभ
अमृत09:23 PM – 10:59 PMबहुत शुभ
चर10:59 PM – 12:35 AMसामान्य
रोग12:35 AM – 02:11 AMअशुभ
काल02:11 AM – 03:47 AMअशुभ
लाभ03:47 AM – 05:23 AMशुभ
उद्वेग05:23 AM – 06:59 AMअशुभ

Preview

सूचना:
चौघड़िया का समय सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर तय होता है,
इसलिए यह हर शहर में अलग-अलग हो सकता है।
अपने स्थान के अनुसार समय देखें।

फाल्गुन अमावस्या (भौमवती) का महत्व: आज मंगलवार को अमावस्या होने से इसे भौमवती अमावस्या कहा जाता है। यह दिन कर्ज से मुक्ति के उपायों और मंगल दोष की शांति के लिए अचूक माना गया है। आज के दिन हनुमान जी की पूजा और पितरों के नाम पर पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाना अत्यंत लाभकारी होता है।

पितृ दोष शांति: जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष है, उन्हें आज दोपहर 03:00 बजे से पहले स्नान-दान और तर्पण कर लेना चाहिए। इसके बाद फाल्गुन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी।

पंचांग देखने की ज़रूरत क्यों पड़ती है?

पंचांग दिन की धार्मिक और ज्योतिषीय स्थिति बताता है। इसी से यह समझ आता है कि पूजा, व्रत या कोई शुभ कार्य किस समय करना उचित रहेगा। ग्रंथों में भी पंचांग को दिनचर्या का मार्गदर्शक माना गया है।

तिथि और तारीख एक जैसी क्यों नहीं होती?

तारीख सूर्य की गणना से बनती है, जबकि तिथि चंद्रमा की गति पर आधारित होती है। इसी कारण कई बार एक ही तारीख में तिथि बदल जाती है। धार्मिक कार्य हमेशा तिथि देखकर ही किए जाते हैं।

क्या पंचांग पूरे भारत में एक-सा होता है?

पंचांग के मुख्य तत्व जैसे तिथि, नक्षत्र और योग लगभग समान रहते हैं। लेकिन सूर्योदय, सूर्यास्त, राहुकाल और चौघड़िया जैसे समय स्थान के अनुसार बदल सकते हैं। इसीलिए स्थानीय समय देखना ज़रूरी माना जाता है।

राहुकाल और चौघड़िया क्यों देखे जाते हैं?

इन समयों को दिन की सावधानी और अनुकूलता समझने के लिए देखा जाता है। कुछ काल नए कार्य के लिए ठीक माने जाते हैं, तो कुछ में रुकना बेहतर होता है। इससे अनावश्यक नुकसान से बचने में मदद मिलती है।

व्रत और पर्व का सही समय कैसे तय होता है?

व्रत और पर्व की मान्यता तिथि और पंचांग गणना पर निर्भर करती है। इसी के अनुसार व्रत रखना, पारणा करना और पूजा का समय तय किया जाता है। गलत समय पर किया गया व्रत पूर्ण फल नहीं देता।

क्या रोज़ पंचांग देखना ज़रूरी है?

रोज़ पंचांग देखना अनिवार्य नहीं है, लेकिन यह दिन को सही ढंग से समझने में मदद करता है। खासतौर पर व्रत, यात्रा या कोई महत्वपूर्ण निर्णय हो तो पंचांग देखना लाभकारी माना गया है।

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