Powerful Shiv Chalisa 2024 : शिव चालीसा का पाठ करने से होंगे ये फायदे !

By | April 10, 2024
Shiv Chalisa in Hindi

Shiv Chalisa : वैसे तो भोलेनाथ को एक बल पत्र से भी प्रसन्न किया जा सकता हैं। लेकिन एक और आसान उपाय है “शिव चालीसा” का पाठ जिसके सरल शब्दों से भगवान देवो के देव महादेव को आसानी से प्रसन्न किया जा सकता है। शिव चालीसा के पाठ को हर सबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद करना चाहिए। भक्तगण ज्यादातर शिव चालीसा का पाठ शिवरात्रि, सोमवार, प्रदोष व्रत, सावन के पवित्र महीने एवं त्रयोदशी व्रत के दौरान शिव चालीस (Shiv Chalisa ka path ) का पाठ खूब करते हैं।

Benefits Of Shiv Chalisa : शिव चालीसा का पाठ करने से होंगे ये फायदे

1. यही मनुष्य को किसी भी वजह से मन में कोई भय हो तो वह शिव चालीसा Shiv Chalisa की निम्न पंक्ति पढ़ें –

जय गणेश गिरीजा सुवन’ मंगल मूल सुजान|
कहते अयोध्या दास तुम’ देउ अभय वरदान||

इस पंक्ति को हर सुबह 11 बार भगवान शिव के सामने पड़े, 40 दिन तक ऐसा लगातार ये पंक्ति पढ़ने से लाभ होगा।

2. मनुष्य को यही लगातार दुखों और परेशानी ने घेर लिया है तो निम्न पंक्ति पढ़ें-

देवन जबहिं जाय पुकारा’ तबहिं दुख प्रभु आप निवारा||

– 11 बार रात में इस पंक्ति को पढ़ कर सोए। यदि आपका कार्य सिद्ध हो जाये तो आप निर्धन लोगों या गरीब बच्चों को सफेद मिठाई जरूर बाटें।

3. यदि कोई कार्य को सिद्ध करने के लिए निम्न पंक्ति पढ़ें-

पूजन रामचंद्र जब कीन्हा’ जीत के लंक विभीषण दीन्हा||

– ऊपर दी गयी पंक्ति को 13 बार शाम के समय पढ़ें और 27 दिनों तक लगातार पड़े।

4. मनोकामना पूर्ति के लिए इस पंक्ति का पाठ करें –

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर’ भई प्रसन्न  दिए इच्छित वर||

– इस पंक्ति को मनोकामना पूर्ति के लिए सुबह के समय 54 बार पाठ करें। ऐसा आपको 21 दिन करना है

Shiv Chalisa : शिव चालीसा का पाठ

॥ दोहा Shiv Chalisa Doha ॥


जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान ।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान ॥

॥  चौपाई Shiv Chalisa Chaupai॥


जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥

भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के ॥

अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥

वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देखि नाग मन मोहे ॥ 4

मैना मातु की हवे दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥

कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥

कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ ॥ 8

देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥

किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥

तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥

आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥ 12

Ujjain Harsiddhi Temple

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥

किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥

वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥ 16

प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला। जरत सुरासुर भए विहाला ॥

कीन्ही दया तहं करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥

पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥

सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥ 20

एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई ॥

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥

जय जय जय अनन्त अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी ॥

दुष्ट सकल नित मोहि सतावै। भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥ 24

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥

लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो ॥

मात-पिता भ्राता सब होई। संकट में पूछत नहिं कोई ॥

स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु मम संकट भारी ॥ 28

धन निर्धन को देत सदा हीं। जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥

अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥

शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥

योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। शारद नारद शीश नवावैं ॥ 32

नमो नमो जय नमः शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥

जो यह पाठ करे मन लाई। ता पर होत है शम्भु सहाई ॥

ॠनियां जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी ॥

पुत्र हीन कर इच्छा जोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥ 36

पण्डित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे ॥

त्रयोदशी व्रत करै हमेशा। ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥

जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥ 40

कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥

॥ दोहा  Shiv Chalisa Doha॥


नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा ।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश ॥

मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान ।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण ॥

||Shiv Chalisa Ends||

शिव चालीसा पढ़ने के नियम क्या हैं ?

  • शिवचालीसा का पाठ करने से पहले शिवचालीसा पाठ करने के नियम जरूर पढ़ ले।
  • महादेव चालीसा पड़ने के लिए सुबह नहा कर साफ़ वस्त्र धारण करें।
  • एक आसन लगा कर शिव जी के नाम का दीपक लगा कर शिव चालीसा का पाठ करें।
  • पाठ करने के बाद आसान उठा कर रख दे।

नोट :- भोलेभंडारी की चालीसा का पाठ दोनों टाइम किया जा सकता हैं। महादेव तो बोले भंडारी हैं उनको जो सच्चे दिल से या भक्ति करता हैं उसकी सभी मनोकामना पूरी होती हैं।

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शिव चालीसा का पाठ क्यों करना चाहिए ?

शिव चालीसा का पाठ करने से आपके सभी रुके हुए कार्य पूर्ण हो जाते हैं महादेव के आशीर्वाद से घर में सुख समृद्धि बानी रहती हैं।


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धर्मकहानी

इस आर्टिकल में शिव चालीसा से जुडी सभी जानकारियाँ दी गयी हैं। यदि आपको कोई और शिव चालीसा से जुड़ा संकोच हो हमें कमेंट में जरूर बताएं ,

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