84 Mahadev Lokpaleshwar Mahadev : यदि आप उज्जैन की प्रसिद्ध 84 महादेव यात्रा पर निकलने वाले हैं, तो श्री लोकपालेश्वर महादेव उज्जैन के दर्शन करना आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह पावन यात्रा का 12वां मंदिर माना जाता है। वैसे तो उज्जैन (अवंतिका) को बाबा महाकाल की नगरी कहा जाता है, जहाँ कण-कण में शिव का वास है लेकिन 84 महादेव की यात्रा करने का अपना अलग महत्व हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस प्राचीन शिवलिंग के दर्शन मात्र से मनुष्य के जन्मों-जन्मों के पाप धुल जाते हैं। आइए, बेहद आसान बोलचाल की भाषा में जानते हैं कि इस Lokpaleshwar Mahadev Mandir का इतिहास क्या है, इसकी पौराणिक कथा क्या है और यहाँ दर्शन करने से क्या-क्या लाभ मिलते हैं।
Ujjain 84 Mahadev Lokpaleshwar Mahadev(12): श्री लोकपालेश्वर महादेव
“द्वादशं विद्धि देवेशि, लोकपलेश्वरम् शिवं।
यस्य दर्शन मात्रेण, सर्वपापैः प्रमुच्यते।।”
हे देवी! यह बारहवां शिवलिंग लोकपालेश्वर है, जिसके केवल दर्शन कर लेने मात्र से ही मनुष्य के सारे संचित पाप नष्ट हो जाते हैं।
लोकपालेश्वर महादेव मंदिर उज्जैन कहाँ स्थित है? (Lokpaleshwar Mahadev Location & Route)
सटीक स्थान: यह पवित्र मंदिर उज्जैन के सुप्रसिद्ध शक्तिपीठ हरसिद्धि माता मंदिर के मुख्य द्वार के बिल्कुल पास स्थित है।
स्थानीय पता: कार्तिक चौक से रघुवंशी मार्ग की तरफ जाते समय, दाहिने हाथ की गली में सीधे चौक के भीतर आपको यह दिव्य मंदिर दिखाई देगा। यहाँ आपको दो महादेव मंदिर पास-पास दिखेंगे, जिसमें पहला श्री प्रयागेश्वर (71वां) और दूसरा श्री लोकपालेश्वर महादेव (12वां) है।
कैसे पहुँचें: महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर से यहाँ की दूरी बहुत कम है। आप महाकाल मंदिर के दर्शन के बाद पैदल, ऑटो या ई-रिक्शा के जरिए आसानी से यहाँ पहुँच सकते हैं।
लोकपालेश्वर महादेव की पौराणिक कथा (Ancient Legend of Lokpaleshwar Mahadev)
स्कंद पुराण के अवंति खंड में इस मंदिर की स्थापना की एक बेहद दिलचस्प कथा मिलती है:
प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप के वंश से उत्पन्न शक्तिशाली दैत्यों (राक्षसों) ने चारों तरफ हाहाकार मचा रखा था। उन्होंने ऋषियों के आश्रम उजाड़ दिए, वेदों का पाठ बंद करवा दिया और पवित्र यज्ञों को नष्ट करना शुरू कर दिया। जब इंद्र, वरुण, यमराज और कुबेर जैसे दिशाओं के रक्षक देवता (जिन्हें सनातन धर्म में ‘लोकपाल’ कहा जाता है) इन दैत्यों से हारने लगे, तो वे डरकर भगवान विष्णु के पास पहुँचे।
भगवान विष्णु ने उनसे कहा कि इस संकट से केवल महादेव ही रक्षा कर सकते हैं, इसलिए वे तुरंत ‘महाकाल वन’ (प्राचीन उज्जैन) जाएँ और शिव जी की तपस्या करें।
जब देवता महाकाल वन की ओर बढ़े, तो दैत्यों को इसकी भनक लग गई और उन्होंने देवताओं का रास्ता रोकने की कोशिश की। दैत्यों से बचने के लिए देवताओं ने एक अनोखी युक्ति अपनाई—उन्होंने खुद को छुपाने के लिए कपालिक रूप धारण कर लिया। देवताओं ने अपने शरीर पर भस्म रमाई, पैरों में नूपुर (घुंघरू) और कमर में घंटी बांधी तथा हाथों में कपाल ले लिया। इस गुप्त भेष में वे बिना किसी बाधा के महाकाल वन पहुँच गए।
वहाँ पहुँचकर उन्हें एक दिव्य शिवलिंग के दर्शन हुए। जैसे ही सभी लोकपाल देवताओं ने इस शिवलिंग की स्तुति और पूजा शुरू की, शिवलिंग से अचानक भयंकर और अत्यंत गर्म दिव्य ज्वालाएँ निकलीं। इन ज्वालाओं ने पल भर में सभी अत्याचारी दैत्यों को जलाकर भस्म कर दिया और देवताओं की रक्षा की। चूंकि इस शिवलिंग ने स्वयं ‘लोकपालों’ की रक्षा की थी, इसलिए इसे लोकपालेश्वर महादेव नाम दिया गया।
लोकपालेश्वर महादेव के दर्शन के लाभ (Significance & Benefits of Worshiping Lokpaleshwar Mahadev)
शत्रुओं पर विजय: मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से जल या दूध चढ़ाने से जीवन के गुप्त शत्रुओं, कोर्ट-कचहरी के मामलों और विरोधियों पर विजय प्राप्त होती है।
मानसिक और शारीरिक शांति: यहाँ का वातावरण बहुत ही शांत और दिव्य है। जो लोग मानसिक तनाव, चिंता या अंदरूनी डर से जूझ रहे होते हैं, उन्हें यहाँ दर्शन करने से असीम मानसिक और शारीरिक शांति मिलती है।
संकटों से रक्षा: जब जीवन में अचानक बहुत सी मुसीबतें एक साथ आ जाएँ, तो लोकपालेश्वर महादेव के दर्शन संकटमोचक साबित होते हैं।
Lokpaleshwar Mahadev ke दर्शन के लिए सबसे खास दिन (Auspicious Days)
वैसे तो भक्त यहाँ हर दिन दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार कुछ खास दिनों पर यहाँ की गई पूजा का कई गुना अधिक फल मिलता है:
- सावन (श्रावण) का महीना और अधिक मास (पुरुषोत्तम मास)।
- सोमवार का दिन।
- संक्रांति, अष्टमी और चतुर्दशी तिथियाँ।
- महाशिवरात्रि, जिस दिन मंदिर को विशेष रूप से सजाया जाता है और यहाँ रुद्राभिषेक का आयोजन होता है।
Disclaimer: यह जानकारी इंटरनेट सोर्सेज के माध्यम से ली गयी है। जानकारी की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। धर्मकहानी का उद्देश्य सटीक सूचना आप तक पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता सावधानी पूर्वक पढ़ और समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इस जानकारी का उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी। अगर इसमें आपको कोई गलती लगाती है तो कृपया आप हमें हमारे ऑफिसियल ईमेल पर जरूर बताये।
चेक फेसबुक पेज
FAQ: लोकपालेश्वर महादेव उज्जैन से जुड़े कुछ जरूरी सवाल
प्रश्न 1: लोकपालेश्वर महादेव उज्जैन के 84 महादेवों में से कौन से नंबर के मंदिर हैं?
उत्तर: श्री लोकपालेश्वर महादेव उज्जैन की चौरासी महादेव यात्रा श्रृंखला के 12वें क्रम पर आते हैं।
प्रश्न 2: लोकपालेश्वर महादेव का मंदिर उज्जैन में कहाँ स्थित है?
उत्तर: यह मंदिर उज्जैन के प्रसिद्ध हरसिद्धि माता मंदिर के मुख्य द्वार के समीप, कार्तिक चौक से रघुवंशी मार्ग की गली में अंदर स्थित है।
प्रश्न 3: लोकपालेश्वर महादेव की पूजा का क्या महत्व है?
उत्तर: पौराणिक कथाओं के अनुसार, इनके दर्शन से शत्रुओं पर विजय मिलती है, संचित पापों का नाश होता है और मानसिक व शारीरिक कष्टों से हमेशा के लिए मुक्ति मिलती है।




