Naag Lok Rahasya Part 4 – दुनिया के हर सभ्यता में हैं नाग और उनके रहस्य

Naag Lok Rahasya Part 4 – दुनिया के हर सभ्यता में हैं नाग और उनके रहस्य

तीन भागों में हमने भारत के नागों की पूरी दुनिया देखी। उनकी उत्पत्ति, उनका लोक, उनके राजा, उनकी देवियाँ, उनके द्वार और उनका दर्शन। लेकिन Naag Lok Rahasya की यह यात्रा केवल भारत तक सीमित नहीं है।

एक सवाल जो हमेशा मन में उठता है वह यह है कि जब दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोगों का आपस में कोई संपर्क नहीं था तब भी उन सबने नाग को पवित्र क्यों माना? मिस्र में, चीन में, मेक्सिको में, यूनान में, सुमेर में। हर जगह नाग था। हर जगह नाग को शक्ति का प्रतीक माना गया। यह संयोग नहीं हो सकता।

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मिस्र का उरायस नाग : फराओ के मुकुट पर वह नाग जो सूर्य की रक्षा करता था

मिस्र की सभ्यता को दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में गिना जाता है। पाँच हजार साल से भी अधिक पुराना यह इतिहास। और इस पूरे इतिहास में नाग की उपस्थिति हर जगह है।

उरायस और देवी वाडजेट की कथा

मिस्र की सभ्यता को दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में गिना जाता है। पाँच हजार साल से भी अधिक पुराना यह इतिहास। और इस पूरे इतिहास में Naag Lok Rahasya से जुड़ी नाग की उपस्थिति हर जगह है।

मिस्र में नाग को उरायस कहते हैं। यह शब्द यूनानी है लेकिन जो नाग इससे जाना जाता है वह मिस्र का कोबरा सांप है। फराओ यानी मिस्र के राजा अपने मुकुट पर इस उरायस नाग को धारण करते थे। यह नाग मुकुट के सामने की तरफ होता था, फन उठाए, जैसे किसी भी शत्रु को देखते ही हमला करने के लिए तैयार हो।

उरायस और देवी वाडजेट की कथा

मिस्र की पौराणिक कथाओं में उरायस नाग का संबंध देवी वाडजेट से है। वाडजेट मिस्र की सबसे प्राचीन देवियों में से एक हैं। उन्हें हरे रंग की नागिन के रूप में दर्शाया जाता है। वाडजेट को निचले मिस्र की रक्षक देवी माना जाता था।

मिस्र की कथाओं के अनुसार जब देवता रा यानी सूर्य देव अपनी नाव में आकाश पार करते थे तब वाडजेट उनकी नाव के आगे बैठकर उनकी रक्षा करती थीं। जो शत्रु आए उन्हें वाडजेट अपनी आग से भस्म कर देती थीं। यह ठीक उसी तरह है जैसे भारत में नाग देवताओं की रक्षा करते हैं।

Naag Lok Rahasya Part 1 – नागों की उत्पत्ति, पाताल के सात स्तर और नाग लोक के प्राचीन द्वार

तूतनखामेन के मुकुट में उरायस

जब 1922 में हावर्ड कार्टर ने तूतनखामेन की कब्र खोली तो वहाँ जो खजाना मिला उसमें सबसे प्रसिद्ध था सोने का मुकुट। उस मुकुट पर उरायस नाग और गिद्ध दोनों एक साथ थे। नाग निचले मिस्र का और गिद्ध ऊपरी मिस्र का प्रतीक। यानी दोनों का राजा एक ही है।

यह देखकर एक सवाल उठता है। भारत में विष्णु के साथ नाग और गरुड़ दोनों हैं। मिस्र में राजा के साथ नाग और गिद्ध दोनों हैं। गरुड़ और गिद्ध दोनों पक्षी हैं। नाग दोनों जगह है। क्या यह संयोग है?

मिस्र में एक और नाग देवता थे जिनका नाम था अपेप या अपोफिस। यह एक विशाल नाग था जो अंधेरे और अराजकता का प्रतीक था। हर रात जब सूर्य देव रा पृथ्वी के नीचे से गुजरते थे तब अपेप उन पर हमला करता था। देवता मिलकर अपेप को हराते थे और सूर्य अगले दिन उगता था। यह कथा भारत के उस दर्शन से मिलती है जिसमें नाग एक तरफ रक्षक है और दूसरी तरफ विनाशक। दोनों एक ही शक्ति के दो रूप हैं।

मेसोपोटामिया का नाग : वह सभ्यता जहाँ नाग ने ज्ञान दिया

मेसोपोटामिया यानी आज का इराक। यहाँ सुमेर और बेबिलोन की सभ्यताएं थीं जो पाँच हजार साल से भी पुरानी हैं। इन सभ्यताओं में नाग और Naag Lok Rahasya का एक बहुत विशेष स्थान था।

सुमेर में नाग को निंगिशजिदा कहते थे। यह देवता नाग के रूप में थे और उन्हें ज्ञान और उपचार का देवता माना जाता था। निंगिशजिदा की छड़ी पर दो नाग लिपटे थे। यह छड़ी आज के चिकित्सा के प्रतीक कैडेसियस से बिल्कुल मिलती है।

गिलगमेश और अमरता का नाग

मेसोपोटामिया की सबसे प्रसिद्ध कथा है गिलगमेश की। गिलगमेश एक राजा था जो अपने मित्र की मृत्यु से इतना दुखी हुआ कि अमरता की तलाश में निकल पड़ा। उसे पता चला कि समुद्र की गहराई में एक ऐसा पौधा है जो अमरता देता है। गिलगमेश ने वह पौधा ढूंढा और निकाला।

लेकिन रास्ते में एक नाग आया और उसने वह पौधा चुरा लिया। नाग ने वह पौधा खाया और अपनी केंचुल उतारकर नया जीवन पाया। गिलगमेश खाली हाथ वापस लौट आया।

यह कथा बहुत गहरी है। नाग ने अमरता का पौधा इसलिए चुराया क्योंकि वही उसका असली उत्तराधिकारी था। नाग केंचुल उतारकर नया जन्म लेता है। यह पुनर्जन्म का प्रतीक है। भारत में भी नाग पुनर्जन्म का प्रतीक है। सांप की पूंछ मृत्यु और पुनर्जन्म दोनों को दर्शाती है।

मेसोपोटामिया में एक और नाग की कथा है जो बाइबिल में भी आई। एडन के बाग में नाग ने आदम और हव्वा को ज्ञान का फल खाने के लिए प्रेरित किया। पश्चिमी धर्मों में इसे पाप का कारण माना गया। लेकिन मेसोपोटामिया की मूल कथा में नाग ज्ञान का देने वाला है, पाप का नहीं। यह वही दर्शन है जो भारत में है जहाँ नाग ज्ञान और शक्ति दोनों का प्रतीक है।

यूनान का नाग : हाइड्रा से लेकर चिकित्सा की छड़ी तक

यूनान की पौराणिक कथाओं में नाग और उससे जुड़े Naag Lok Rahasya का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। यूनान में नाग को ओफिस कहते हैं। यूनानी पौराणिक कथाओं में नाग कई रूपों में आता है।

सबसे प्रसिद्ध है हाइड्रा। यह एक नौ सिर वाला नाग था जो लर्नाई झील में रहता था। हर बार जब हरक्युलिस एक सिर काटता था तो उसकी जगह दो और सिर उग आते थे। हाइड्रा को मारना हरक्युलिस के बारह कामों में से एक था।

Naag Lok Rahasya Part 2 – शेषनाग की तपस्या, वासुकि का बलिदान और नागमणि का रहस्य

एस्क्लेपियस की छड़ी : चिकित्सा का वह प्रतीक

यूनान में एस्क्लेपियस चिकित्सा के देवता थे। उनकी छड़ी पर एक नाग लिपटा था। यह छड़ी आज भी चिकित्सा का अंतरराष्ट्रीय प्रतीक है। दुनिया भर के अस्पतालों और चिकित्सा संस्थाओं के लोगो में यह नाग वाली छड़ी दिखती है।

यूनानी मान्यता में नाग चिकित्सा का प्रतीक इसलिए बना क्योंकि नाग केंचुल उतारकर नया जीवन पाता है। यह पुनर्जन्म और उपचार दोनों का प्रतीक है। और यही दर्शन भारत में भी है।

पाइथन और अपोलो की कथा

यूनानी कथाओं में एक और प्रसिद्ध नाग है पाइथन। यह एक विशाल नाग था जो डेल्फी में माउंट पार्नासस पर रहता था। देवी गाया ने इसे बनाया था और यह भविष्य बता सकता था।

देवता अपोलो ने पाइथन को मारा और डेल्फी पर अपना अधिकार जमाया। लेकिन यहाँ रोचक बात यह है कि पाइथन को मारने के बाद भी अपोलो के मंदिर में भविष्यवाणी होती रही। वह भविष्यवाणी करने वाली पुजारिन को पाइथिया कहते थे यानी पाइथन की शक्ति से प्रेरित। नाग मरकर भी अपनी शक्ति छोड़ गया।

यूनान में मेडुसा की कथा है जिसके सिर पर बालों की जगह नाग थे। जो उसे देखता था वह पत्थर बन जाता था। परशेयस ने आईने में उसका प्रतिबिंब देखकर उसका सिर काटा। मेडुसा के रक्त से पेगासस नाम का पंखदार घोड़ा जन्मा। यह कथा और भारत की गरुड़-नाग की कथा में एक गहरी समानता है। नाग और पक्षी का संबंध, नाग की मृत्यु से एक नई शक्ति का जन्म। दोनों संस्कृतियों में यह एक जैसा है।

चीन का ड्रैगन : वह नाग जो पूरब का सबसे शक्तिशाली प्रतीक बना

    चीन में ड्रैगन को लोंग कहते हैं। चीनी ड्रैगन पश्चिमी ड्रैगन से बिल्कुल अलग है। पश्चिमी ड्रैगन आग उगलने वाला राक्षस है। लेकिन चीनी ड्रैगन एक शुभ और दिव्य प्राणी है।

    चीनी ड्रैगन का शरीर देखें तो वह नाग जैसा ही है। लंबा, सर्पाकार, शल्कों से ढका। उसके चार पैर हैं और कभी-कभी पंख भी। लेकिन उसकी मूल आकृति नाग जैसी ही है।

    चीनी ड्रैगन और भारतीय नाग की समानताएं

    चीनी ड्रैगन को शक्ति, सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। वह वर्षा लाता है, नदियों का स्वामी है, समुद्र की गहराई में रहता है। यह सब गुण भारत के नाग में भी हैं।

    भारत में नाग वर्षा के देवता हैं। एलापत्र नाग वर्षा के स्वामी थे। शेषनाग समुद्र की गहराई में रहते हैं। नाग नदियों के स्वामी हैं। यह सब समानताएं बताती हैं कि चीनी ड्रैगन और Naag Lok Rahasya के भारतीय नाग की जड़ें एक ही हो सकती हैं।

    चीन के नाग राजा और भारत के नाग राजा

    चीनी पौराणिक कथाओं में ड्रैगन राजा हैं जो समुद्र की गहराई में अपने महलों में रहते हैं। यह चार हैं और चारों दिशाओं के स्वामी हैं। उनके महल रत्नों से बने हैं और वहाँ अनेक दिव्य प्राणी रहते हैं।

    यह वर्णन भारत के नाग लोक से कितना मिलता-जुलता है। नाग लोक में भी रत्नों से बने महल हैं। नाग लोक भी जल के भीतर है। नाग राजा भी दिशाओं के स्वामी हैं।

    इतिहासकारों का मानना है कि भारत और चीन के बीच व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान हजारों साल पुराना है। बौद्ध धर्म भारत से चीन गया और उसके साथ नाग की कथाएं भी गईं। लेकिन चीन में ड्रैगन की अवधारणा बौद्ध धर्म के आने से भी पहले थी। इसलिए यह संबंध और भी पुराना है।

    चीन में एक परंपरा है जिसे ड्रैगन बोट फेस्टिवल कहते हैं। यह त्योहार हर साल चंद्र कैलेंडर के पाँचवें महीने के पाँचवें दिन मनाया जाता है। इस दिन नदियों में लंबी नावें चलाई जाती हैं जिन पर ड्रैगन की आकृति होती है। यह नाग की उपासना का एक रूप है। और भारत में नागपंचमी भी पाँचवें महीने की पाँचवीं तिथि को मनाई जाती है। श्रावण शुक्ल पंचमी। दोनों में पाँच की संख्या और नाग का संबंध। यह संयोग बहुत गहरा है।

    मेसोअमेरिका का पंखयुक्त सर्प : क्वेत्जालकोआटल और वह रहस्य जो आज तक नहीं सुलझा

    मेक्सिको और मध्य अमेरिका की माया और एज़्टेक सभ्यताओं में एक ऐसा देवता था जो पूरी दुनिया में अपनी तरह का अकेला है। क्वेत्जालकोआटल। यह नाम दो शब्दों से बना है। क्वेत्जाल यानी एक सुंदर पंखदार पक्षी और कोआटल यानी नाग। यानी पंखदार नाग।

    क्वेत्जालकोआटल को एक विशाल नाग के रूप में दिखाया जाता है जिसके पूरे शरीर पर हरे और नीले पंख हैं। यह नाग है लेकिन उड़ सकता है। यह पृथ्वी और आकाश दोनों का स्वामी है।

    क्वेत्जालकोआटल की भूमिका

    माया और एज़्टेक कथाओं में क्वेत्जालकोआटल को ज्ञान, कला, कृषि और हवा का देवता माना जाता था। वह मनुष्यों को ज्ञान देने वाला था। उसने मनुष्यों को मक्का उगाना सिखाया जो मेसोअमेरिकी सभ्यताओं का मूल अनाज था।

    यह भूमिका Naag Lok Rahasya में वर्णित भारत के नागों से कितनी मिलती है। भारत में नाग ज्ञान के देवता हैं। नागमणि ज्ञान देती है। नाग लोक में ऐसी औषधियाँ हैं जो रोग दूर करती हैं। दोनों में नाग ज्ञान और जीवन का देने वाला है।

    टियोतीहुआकान का पिरामिड और नाग

    मेक्सिको में टियोतीहुआकान नाम का एक प्राचीन शहर है जो दो हजार साल पुराना है। इस शहर में क्वेत्जालकोआटल का मंदिर है। उस मंदिर की दीवारों पर पंखदार नाग की मूर्तियाँ हर जगह हैं। हर नाग के मुख से एक मानव सिर निकल रहा है।

    यह दृश्य भारत की उस परंपरा से मिलता है जिसमें नाग के मुख से देवताओं का जन्म होता है। नाग और मनुष्य का यह संबंध मेसोअमेरिका में भी उतना ही गहरा था।

    एज़्टेक कैलेंडर में एक दिन को नाग के नाम पर रखा गया था। यह दिन Coatl यानी नाग का दिन था और इस दिन को शुभ माना जाता था। इस दिन जन्मे बच्चे भाग्यशाली माने जाते थे। भारत में नागपंचमी पर जन्मे बच्चों के बारे में भी यही मान्यता है कि वे विशेष होते हैं। एक दूसरे से बिल्कुल अनजान दो सभ्यताओं में यह एक जैसी मान्यता कैसे आई?

    सुमेर और मिस्र से पहले : वह प्राचीनतम नाग परंपरा जो सबकी जड़ है

    जब हम Naag Lok Rahasya से जुड़ी इन सारी सभ्यताओं को एक साथ देखते हैं तो एक सवाल उठता है। यह सब कहाँ से आया? इन सबकी जड़ क्या है?

    पुरातत्वविदों ने दुनिया के सबसे प्राचीन धार्मिक स्थल खोजे हैं। तुर्की में गोबेकली टेपे जो बारह हजार साल पुराना है। वहाँ की दीवारों पर नाग की आकृतियाँ मिली हैं। यह उस समय की है जब न मिस्र था, न सुमेर, न हड़प्पा। लेकिन नाग था।

    यह बताता है कि नाग की उपासना मानव सभ्यता के उदय से भी पहले से है। जब मनुष्य ने पहली बार किसी को पूजना शुरू किया तब उसने नाग को चुना। क्यों?

    नाग को पहले क्यों पूजा गया

    इसके कई कारण हो सकते हैं। पहला, नाग रहस्यमयी है। वह बिना पैर के चलता है। वह कहीं से भी निकल सकता है। वह बिना आवाज के आता है। यह रहस्य प्रारंभिक मनुष्य के मन में भय और श्रद्धा दोनों जगाता था।

    दूसरा, नाग केंचुल उतारकर नया जीवन पाता है। यह पुनर्जन्म का सबसे स्पष्ट प्रतीक है। जब प्रारंभिक मनुष्य ने मृत्यु और पुनर्जन्म के बारे में सोचा तो नाग उसका सबसे सटीक उदाहरण था।

    तीसरा, नाग धरती के नीचे रहता है। धरती के नीचे मृतक जाते हैं। इसलिए नाग पूर्वजों और मृतकों से जुड़ा माना गया। और पूर्वजों की पूजा हर सभ्यता में होती है।

    Naag Lok Rahasya Part 3 – कुंडलिनी सर्प क्यों है, कालसर्प दोष का पौराणिक सच और नागपंचमी के तीन अनसुने रहस्य

    दुनिया के कई हिस्सों में प्राचीन गुफाओं में नाग की आकृतियाँ मिली हैं जो बीस-पच्चीस हजार साल पुरानी हैं। बोत्सवाना में राइनो गुफा में एक विशाल पत्थर है जो नाग के आकार का है और उस पर तीन सौ से अधिक छेद बने हैं जो शायद अनुष्ठान के लिए थे। यह दुनिया का सबसे पुराना ज्ञात धार्मिक स्थल माना जाता है। और वह भी नाग से जुड़ा है।

    सभी सभ्यताओं में नाग की एक तुलनात्मक दृष्टि

    अब Naag Lok Rahasya के संदर्भ में इन सारी सभ्यताओं को एक साथ देखते हैं। कुछ बातें हैं जो हर जगह समान हैं।

      नाग और जल का संबंध : हर सभ्यता में

      भारत में नाग नदियों और समुद्र के स्वामी हैं। शेषनाग क्षीर सागर में हैं। मिस्र में उरायस नाग नील नदी से जुड़ा है। चीन में ड्रैगन राजा समुद्र में रहते हैं। मेसोअमेरिका में क्वेत्जालकोआटल को वर्षा का देवता माना जाता था। मेसोपोटामिया में नाग देवता नदियों के स्वामी थे। हर जगह नाग पानी से जुड़ा है।

      नाग और ज्ञान का संबंध : हर सभ्यता में

      भारत में नागमणि ज्ञान देती है। नाग वेदों के रक्षक हैं। मेसोपोटामिया में निंगिशजिदा ज्ञान का देवता है। यूनान में एस्क्लेपियस की छड़ी पर नाग ज्ञान और उपचार का प्रतीक है। बाइबिल में नाग ने ज्ञान का फल दिया। मेसोअमेरिका में क्वेत्जालकोआटल ने मनुष्यों को ज्ञान दिया। हर जगह नाग ज्ञान का देने वाला है।

      नाग और पुनर्जन्म : हर सभ्यता में

      नाग केंचुल उतारता है और नया जन्म लेता है। यह प्रतीक हर सभ्यता ने समझा। भारत में सांप की पूंछ मृत्यु और पुनर्जन्म का प्रतीक है। मिस्र में उरोबोरोस नाम का नाग अपनी ही पूंछ खाता है जो अनंत चक्र का प्रतीक है। मेसोपोटामिया में गिलगमेश की कथा में नाग अमरता पाता है। यूनान में हाइड्रा का हर सिर कटने पर दो सिर उगते हैं यानी मृत्यु से अधिक जीवन।

      नाग और रक्षा : हर सभ्यता में

      भारत में नाग मंदिरों, घरों और देवताओं की रक्षा करते हैं। मिस्र में उरायस फराओ की रक्षा करता है। बौद्ध धर्म में मुचलिंद नाग बुद्ध की रक्षा करता है। जैन धर्म में धरणेंद्र नाग पार्श्वनाथ की रक्षा करता है। चीन में ड्रैगन राजा की रक्षा करता है। हर जगह नाग रक्षक है।

      वह एक सवाल जो सबसे जरूरी है : यह सब एक जैसा क्यों है

      यह वह सवाल है जिसका जवाब इतिहासकार, पुरातत्वविद और धर्म के विद्वान सदियों से ढूंढ रहे हैं। दुनिया के अलग-अलग कोनों में जहाँ एक-दूसरे से कोई संपर्क नहीं था वहाँ भी Naag Lok Rahasya के अंतर्गत नाग को एक जैसे गुणों वाला क्यों माना गया?

        इसके तीन मुख्य उत्तर दिए जाते हैं।

        पहला उत्तर : मानव मन की सार्वभौमिक प्रतिक्रिया

        कार्ल युंग नाम के एक प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक ने collective unconscious यानी सामूहिक अचेतन की अवधारणा दी। उनका कहना था कि सभी मनुष्यों के मन में कुछ आधारभूत प्रतीक होते हैं जो सहज ज्ञान से आते हैं। नाग उन्हीं सार्वभौमिक प्रतीकों में से एक है।

        नाग को देखकर हर मनुष्य के मन में भय और सम्मान दोनों जागते हैं। यह प्राकृतिक प्रतिक्रिया है। इसी से हर जगह नाग को शक्ति का प्रतीक माना गया।

        दूसरा उत्तर : प्राचीन व्यापार और सांस्कृतिक संपर्क

        इतिहासकारों का मानना है कि प्राचीन काल में व्यापारिक मार्गों के जरिए दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में विचारों का आदान-प्रदान होता था। भारत के व्यापारी मेसोपोटामिया जाते थे। मेसोपोटामिया के व्यापारी मिस्र जाते थे। यूनानी व्यापारी भारत आते थे।

        इन व्यापारिक संपर्कों के साथ धार्मिक विचार भी यात्रा करते थे। नाग की कथाएं एक सभ्यता से दूसरी सभ्यता में गईं और हर जगह उन्होंने स्थानीय रंग अपनाया।

        तीसरा उत्तर : वह सत्य जो भारतीय दर्शन कहता है

        भारतीय दर्शन का तीसरा उत्तर सबसे गहरा है। वेदांत कहता है कि एक ही सत्य है जो अलग-अलग रूपों में प्रकट होता है। एकं सत् विप्रा बहुधा वदन्ति यानी सत्य एक है लेकिन विद्वान उसे कई नामों से बुलाते हैं।

        नाग उस एक सत्य का प्रतीक है। वह शक्ति जो अनंत है, जो पुनर्जन्म लेती है, जो ज्ञान देती है, जो रक्षा करती है और जो अंत में सब कुछ अपने में समेट लेती है। हर सभ्यता ने इस शक्ति को अपने-अपने तरीके से पहचाना और नाग के रूप में उसे व्यक्त किया।

        दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में उरोबोरोस की आकृति मिलती है। उरोबोरोस वह नाग है जो अपनी खुद की पूंछ खाता है। यह आकृति मिस्र में मिली, यूनान में मिली, नॉर्स पौराणिक कथाओं में मिली और भारत में भी। यह अनंत चक्र का प्रतीक है। जीवन, मृत्यु और पुनर्जन्म का चक्र। यह आकृति इतनी व्यापक रूप से क्यों मिलती है? इसका जवाब शायद यह है कि यह सत्य इतना मूलभूत है कि हर सभ्यता ने इसे अपने आप खोजा।

        भारत का नाग दर्शन : दुनिया का सबसे गहरा और सबसे पूर्ण नाग दर्शन

        दुनिया की सभ्यताओं में नाग और Naag Lok Rahasya को देखने के बाद एक बात स्पष्ट होती है। हर जगह नाग है लेकिन नाग का सबसे विस्तृत, सबसे गहरा और सबसे दार्शनिक वर्णन भारत में है।

          मिस्र में नाग राजा की रक्षा करता है। यह एक भूमिका है। चीन में नाग शक्ति और सौभाग्य का प्रतीक है। यह एक गुण है। यूनान में नाग ज्ञान और उपचार का प्रतीक है। यह एक विशेषता है।

          लेकिन भारत में नाग यह सब है और इससे भी बहुत अधिक। नाग यहाँ एक पूरा दर्शन है। शेषनाग सृष्टि का आधार है। वासुकि बलिदान का प्रतीक है। तक्षक नियति का प्रतीक है। कालिया नाग क्षमा का प्रतीक है। मनसा देवी त्याग की प्रतीक हैं। कुंडलिनी ज्ञान का प्रतीक है। नागमणि दिव्यता का प्रतीक है।

          भारत में नाग केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं है। यह जीवन जीने का एक तरीका है। नाग की तरह शांत रहो जब तक छेड़ा न जाए। नाग की तरह केंचुल उतारो यानी पुरानी आदतें छोड़ो। नाग की तरह अपनी शक्ति को नियंत्रित रखो। और नाग की तरह जब समर्पण का समय हो तब वासुकि की तरह अपने राजा के गले का आभूषण बन जाओ।

          भारत में आज भी नागों की उपस्थिति पर्यावरण संरक्षण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जहाँ-जहाँ सर्पकावु हैं वहाँ जैव विविधता अधिक है। जहाँ नाग की पूजा होती है वहाँ किसान सांपों को नहीं मारते। और सांप खेतों के कीटों को खाते हैं जिससे फसल अच्छी होती है। हजारों साल पहले हमारे पूर्वजों ने यह समझ लिया था कि नाग पारिस्थितिक तंत्र का अनिवार्य हिस्सा है। इसलिए उसे पूजनीय बनाया ताकि लोग उसे मारें नहीं। यह विज्ञान और धर्म का वह सुंदर मेल है जो भारतीय परंपरा की सबसे बड़ी विशेषता है।

          Naag Lok Rahasya : चारों भागों की पूरी यात्रा का सार

          चार भागों में हमने नागों की एक पूरी दुनिया देखी। भाग एक में नागों की उत्पत्ति से लेकर नाग लोक के द्वारों तक। भाग दो में शेषनाग की तपस्या से लेकर नागमणि के रहस्य तक। भाग तीन में शिव और नागों के रिश्ते से लेकर नागपंचमी के तीन आयामों तक। और इस भाग चार में पूरी दुनिया में नाग की उपस्थिति से लेकर उस वैश्विक सत्य तक जो सबको जोड़ता है।

          नाग एक प्राणी नहीं है। नाग एक दर्शन है। एक शक्ति है। एक सत्य है। जो अनंत है, जो पुनर्जन्म लेता है, जो ज्ञान देता है, जो रक्षा करता है और जो अंत में सब कुछ अपने में समेट लेता है।

          जब अगली बार नाग दिखे तो डरो मत। रुको। देखो। उस प्राचीन शक्ति को महसूस करो जो हजारों साल से इस धरती पर है। वह शक्ति जिसने शेषनाग के रूप में पृथ्वी को थामा हुआ है। वह शक्ति जिसने वासुकि के रूप में समुद्र मंथन में भाग लिया। वह शक्ति जिसने मुचलिंद के रूप में बुद्ध की रक्षा की। और वह शक्ति जो आज भी तुम्हारी रीढ़ में कुंडलिनी के रूप में सोई है और जागने की प्रतीक्षा कर रही है।

          ॥ अंतिम नाग स्तुति ॥

          अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्।

          शंखपालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा॥

          एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्।

          सायंकाले पठेन्नित्यं प्रातःकाले विशेषतः।

          तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत्॥

          — महाभारत आदिपर्व

          जो इन नौ नागों के नाम नित्य सुबह-शाम पढ़ता है उसे विष का भय नहीं रहता और वह सर्वत्र विजयी होता है

          ॥ नागेभ्यो नमः ॥
          सर्पेभ्यो नमः
          अनन्ताय नमः

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