Shri Apsareshwar Mahadev : 84 महादेव पवित्र यात्रा श्रृंखला के 17वें महादेव – श्री अप्सरेश्वर महादेव उज्जैन का स्थान सौंदर्य, सौभाग्य और कामना पूर्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। उज्जैन (अवंतिका) की पावन और मोक्षदायिनी भूमि पर साक्षात महादेव 84 अलग-अलग दिव्य स्वरूपों में निवास करते हैं। जो भी भक्त उज्जैन की प्रसिद्ध चौरासी महादेव यात्रा पर निकलता है, वह कदम-कदम पर दिव्य शक्तियों का अनुभव करता है।
इन्हें स्थानीय स्तर पर अप्सरेश्वर महादेव भी पुकारा जाता है। स्कंद पुराण के अवंति खंड के अनुसार, इनके केवल दर्शन मात्र से ही मनुष्य की सभी मनोवांछित इच्छाएं पूरी हो जाती हैं और खोया हुआ वैभव पुनः प्राप्त हो जाता है। आइए, बेहद सरल और आम बोलचाल की भाषा में समझते हैं कि इस प्राचीन मंदिर का सही स्थान क्या है, इसकी अद्भुत पौराणिक कथा क्या है और यहाँ पूजन करने से हमें क्या-क्या लाभ मिलते हैं।
Ujjain 84 Mahadev Apsareshwar Mahadev (17): श्री अप्सरेश्वर महादेव उज्जैन
स्कंद पुराण के ‘चतुरशीतिलिंग माहात्म्य’ में चौरासी महादेव यात्रा के इस 17वें शिवलिंग का दिव्य श्लोक इस प्रकार दर्ज है:
देवम् सप्तदशं विद्धि विख्यातुम् अप्सरेश्वरम्।
यस्य दर्शन-मात्रेण लोकः अभीष्टम् अवाप्नुयात्।।
सरल अर्थ: हे देवी! तुम जानो कि अवंतिका क्षेत्र में स्थित यह सत्रहवां (17वां) शिवलिंग ‘अप्सरेश्वर’ के नाम से विख्यात है, जिसके केवल दर्शन कर लेने मात्र से ही मनुष्य को उसके मनचाहे (अभिलाषित) फल की प्राप्ति हो जाती है।
श्री अप्सरेश्वर महादेव मंदिर उज्जैन कहाँ स्थित है? (Apsareshwar Mahadev Location & Route)
उज्जैन शहर के ऐतिहासिक और व्यापारिक क्षेत्र पटनी बाजार में स्थित होने के कारण इस दिव्य मंदिर तक पहुँचना बहुत ही आसान है।
- सटीक स्थान: पटनी बाजार उज्जैन अप्सरेश्वर महादेव मंदिर पटनी बाजार के पास सुगंधी गली (Sugandhi Gali) या मोदी की गली में एक प्राचीन कुएं के पास स्थित है।
- स्थानीय पता: भौगोलिक दृष्टि से यह मंदिर उज्जैन के सुप्रसिद्ध हरसिद्धि माता मंदिर के सामने स्थित है। इसके समीप ही 15वें महादेव (श्री इन्द्रद्युम्नेश्वर) और 16वें महादेव (श्री ईशानेश्वर) भी विराजमान हैं।
- कैसे पहुँचें: महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर या हरसिद्धि मंदिर से इस स्थान की दूरी बहुत ही कम है। आप महाकाल दर्शन करने के बाद ऑटो, ई-रिक्शा या पैदल ही पटनी बाजार की सुगंधी गली में इस मंदिर तक सुगमता से पहुँच सकते हैं।
श्री अप्सरेश्वर महादेव मंदिर का अनूठा और दिव्य स्वरूप (Apsareshwar Mahadev Temple Architecture)
Apsareshwar Mahadev Temple Ujjain का वातावरण सदियों पुरानी आस्था, पवित्रता और अद्भुत शांति को समेटे हुए है।
- यहाँ गर्भगृह में एक अत्यंत प्राचीन और चमत्कारी शिवलिंग स्थापित है, जिसे दिव्य सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है।
- खगोलीय और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस मंदिर के स्थान का सीधा संबंध शुक्र ग्रह (Planet Venus) की कक्षा से माना जाता है, जो सौंदर्य, कला और वैवाहिक सुख का कारक है।
- मंदिर का शांत और आध्यात्मिक वातावरण ध्यान लगाने और मानसिक तनाव को दूर करने के लिए सर्वोत्तम है।
अप्सरेश्वर महादेव की पौराणिक कथा: अप्सरा रंभा के शापमोचन की कहानी (Legend of Apsareshwar Mahadev)
स्कंद पुराण के अवंति खंड में Apsareshwar Mahadev Mandir Ujjain का इतिहास और इनकी स्थापना की एक अत्यंत रोचक और शिक्षाप्रद कथा मिलती है:
पौराणिक काल में देवराज इंद्र स्वर्गलोक के अति सुंदर नंदन वन (नंदन कानन) में विराजमान थे। उस समय गंधर्व, किन्नर और यक्ष मधुर संगीत गा रहे थे और इंद्रदेव के मनोरंजन के लिए स्वर्ग की सबसे सुंदर अप्सरा रंभा नृत्य कर रही थीं। नृत्य करते समय अचानक किसी की याद आने के कारण रंभा का मन भटक गया और उनके पैरों की लय बिगड़ गई।
नृत्य में इस बड़ी भूल को देखकर इंद्रदेव अत्यंत क्रोधित हो गए। उन्होंने रंभा को श्राप दे दिया, “तुम तुरंत अपनी सारी कांति और सौंदर्य खोकर रूपहीन हो जाओ और मृत्युलोक (पृथ्वी) पर जाकर कष्ट भोगो।” श्राप के प्रभाव से रंभा तत्काल पृथ्वी पर आ गिरी और रूपहीन होकर विलाप करने लगी। अपनी सखी का यह भारी दुःख देखकर स्वर्ग की अन्य अप्सराएं भी पृथ्वी पर आ गईं और विलाप करने लगीं।
उसी समय वहां से देवर्षि नारद गुजर रहे थे। उन्होंने सुंदर अप्सराओं को रोते देखा तो उनकी चिंता का कारण पूछा। अप्सराओं ने इंद्रदेव के श्राप की पूरी कहानी नारद जी को सुनाई।
नारद जी ने ध्यान लगाया और अप्सराओं से कहा, “आप सभी बिना विलंब किए तुरंत पृथ्वी के सबसे पावन स्थल ‘महाकाल वन’ (उज्जैन) जाएं। वहां हरसिद्धि पीठ के सामने एक अत्यंत चमत्कारी दिव्य शिवलिंग स्थापित है। तुम सभी श्रद्धापूर्वक उस शिवलिंग की आराधना करो। इसी शिवलिंग की आराधना से पूर्व काल में अप्सरा उर्वशी ने भी राजा पुरूरवा को पुनः प्राप्त किया था।”
नारद जी का उपदेश सुनकर रंभा और अन्य सभी अप्सराएं तुरंत महाकाल वन पहुँचीं। उन्होंने हरसिद्धि पीठ के सामने उस दिव्य शिवलिंग की स्थापना की और जल, बेलपत्र व पुष्पों से घोर आराधना की। अप्सराओं की निष्काम और कठिन भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और उन्होंने रंभा को इंद्रदेव के श्राप से तत्काल मुक्त कर दिया।
महादेव ने वरदान दिया, “तुम सभी पुनः अपने दिव्य रूप, खोए हुए सौभाग्य और यश को प्राप्त कर स्वर्गलोक की शोभा बनोगी।” चूंकि इस शिवलिंग की आराधना स्वयं स्वर्ग की अप्सराओं ने की थी, इसलिए महादेव की आज्ञा से यह शिवलिंग संसार में श्री अप्सरेश्वर महादेव (Apsareshwar Mahadev) के नाम से विख्यात हुआ।
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श्री अप्सरेश्वर महादेव के दर्शन के लाभ (Significance & Benefits of Worshiping Shri Apsareshwar Mahadev)
- खोए हुए मान-सम्मान की प्राप्ति: यदि आपका पद छिन गया है, व्यापार में घाटा हुआ है या समाज में प्रतिष्ठा कम हो गई है, तो यहाँ दर्शन से खोया हुआ मान-सम्मान और गौरव पुनः प्राप्त होता है।
- शीघ्र विवाह और उत्तम जीवनसाथी: ऐसी मान्यता है कि जो लड़कियां विवाह में आ रही अड़चनों से परेशान हैं, उन्हें यहाँ श्रद्धापूर्वक जल चढ़ाना चाहिए। इससे मांगलिक दोष दूर होते हैं और मनपसंद व योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है।
- राज्य सुख और मोक्ष की प्राप्ति: स्कंद पुराण के अनुसार, इस शिवलिंग को स्पर्श करने मात्र से ही मनुष्य को सांसारिक जीवन में सभी सुख (राज्य सुख) मिलते हैं और मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है।
- सौंदर्य और तेज की वृद्धि: अप्सरेश्वर महादेव की पूजा से व्यक्ति के रूप, रंग, तेज और आंतरिक आकर्षण में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
Shri Apsareshwar Mahadev ke दर्शन के लिए सबसे उत्तम और शुभ समय (Best Time to Visit)
Apsareshwar Mahadev Mandir में सामान्यतः भक्त प्रतिदिन आते हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार कुछ खास अवसरों पर पूजा का अनंत फल मिलता है:
- श्रावण (सावन) का पावन महीना और अधिक मास (पुरुषोत्तम मास)।
- सोमवार और शुक्रवार का दिन, शुक्रवार का दिन शुक्र ग्रह से जुड़े दोषों को शांत करने के लिए सबसे उत्तम है।
- प्रत्येक महीने की अष्टमी, पूर्णिमा और चतुर्दशी तिथियाँ।
- महाशिवरात्रि, इस महापर्व पर मंदिर में विशेष श्रृंगार, महाआरती और रुद्राभिषेक का आयोजन किया जाता है।
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FAQ: Apsareshwar Mahadev Mandir उज्जैन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सवाल
प्रश्न 1: चौरासी महादेव यात्रा में Apsareshwar Mahadev का कौन सा स्थान है?
उत्तर: श्री अप्सरेश्वर महादेव उज्जैन की प्रसिद्ध चौरासी महादेव यात्रा श्रृंखला के 17वें क्रम पर आते हैं।
प्रश्न 2: अप्सरेश्वर महादेव का मंदिर उज्जैन में कहाँ स्थित है?
उत्तर: Apsareshwar Mahadev Mandir Ujjain के प्रसिद्ध पटनी बाजार क्षेत्र में सुगंधी गली (Modi ki Gali) के भीतर, हरसिद्धि माता मंदिर के ठीक सामने स्थित है।
प्रश्न 3: अप्सरेश्वर महादेव की कहानी किस अप्सरा से संबंधित है?
उत्तर: Apsareshwar Mahadev ki Pauranik katha स्वर्ग की प्रसिद्ध अप्सरा रंभा से संबंधित है, जिन्हें इंद्रदेव के श्राप से मुक्ति पाने के लिए महाकाल वन में तपस्या करने की सलाह देवर्षि नारद ने दी थी।
प्रश्न 4: इस मंदिर में दर्शन करने से क्या मुख्य लाभ मिलता है?
उत्तर: यहाँ दर्शन व स्पर्श करने से खोया हुआ मान-सम्मान वापस मिलता है, मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त होता है, वैवाहिक बाधाएं दूर होती हैं और अंतकाल में मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
Disclaimer: दोस्तों, यह जानकारी इंटरनेट सोर्सेज से ली गयी है। लेकिन आप अगर यात्रा पर जाये तो पहले अच्छे से पता कर ले। धर्मकहानी का उद्देश्य सटीक सूचना आप तक पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता सावधानी पूर्वक पढ़ और समझकर ही लें। अगर इसमें आपको कोई गलती लगाती है तो कृपया आप हमें हमारे ऑफिसियल ईमेल पर जरूर बताये।
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