Shri Kalakaleshwar Mahadev : 84 महादेव की पवित्र यात्रा श्रृंखला के 18वें महादेव – श्री कलकलेश्वर महादेव उज्जैन का स्थान गृह-क्लेश से मुक्ति और पारिवारिक शांति के लिए सबसे अचूक माना जाता है। उज्जैन (अवंतिका) की पावन और मोक्षदायिनी भूमि पर साक्षात महादेव 84 अलग-अलग दिव्य स्वरूपों में निवास करते हैं। जो भी भक्त उज्जैन की प्रसिद्ध चौरासी महादेव यात्रा पर निकलता है, उसे हर एक मंदिर में गहरी शांति और दिव्य कथाओं का अनुभव होता है।
स्कंद पुराण के अवंति खंड के अनुसार, इनके केवल दर्शन मात्र से ही परिवारों में चल रहा भयंकर कलह हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है। आइए, बेहद सरल और आम बोलचाल की भाषा में समझते हैं कि इस प्राचीन मंदिर का सही स्थान क्या है, इसकी अद्भुत पौराणिक कथा क्या है और यहाँ पूजन करने से क्या-क्या लाभ मिलते हैं।
Ujjain 84 Mahadev Kalakaleshwar Mahadev (18): श्री कलकलेश्वर महादेव उज्जैन
स्कंद पुराण के ‘चतुरशीतिलिंग माहात्म्य’ में चौरासी महादेव यात्रा के इस 18वें शिवलिंग का पावन श्लोक इस प्रकार दर्ज है:
देवमष्टादशं विद्धि ख्यातं कलकलेश्वरम्।
यस्य दर्शनमात्रेण कलहो नैव जायते।।सरल अर्थ: हे देवी! तुम जानो कि अवंतिका क्षेत्र में स्थित यह अष्टादश (18वां) शिवलिंग ‘कलकलेश्वर’ के नाम से विख्यात है, जिसके केवल दर्शन कर लेने मात्र से ही मनुष्यों के जीवन में कभी भी कलह और विवाद उत्पन्न नहीं होता है।
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श्री कलकलेश्वर महादेव मंदिर उज्जैन कहाँ स्थित है? (Kalakaleshwar Mahadev Location & Route)
उज्जैन शहर के हृदय स्थल में प्रसिद्ध गोपाल मंदिर के बेहद नजदीक होने के कारण इस मंदिर तक पहुँचना बहुत ही आसान है।
- सटीक स्थान: मोदी की गली उज्जैन Kalakaleshwar Mahadev मंदिर प्रसिद्ध गोपाल मंदिर के पास मोदी की गली (Modi ki Gali) में स्थित है।
- स्थानीय पता: पटनी बाजार क्षेत्र में मोदी की गली के भीतर, अग्रवाल धर्मशाला के बिल्कुल सामने यह पावन मंदिर स्थापित है। इसके पास ही 17वें महादेव (श्री अप्सरेश्वर) भी विराजमान हैं, जिससे भक्तों को क्रम के अनुसार यात्रा करने में सुविधा होती है।
- कैसे पहुँचें: महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर या गोपाल मंदिर से इसकी दूरी बहुत ही कम है। आप ई-रिक्शा, ऑटो या पैदल ही पटनी बाजार की मोदी की गली में इस मंदिर तक सुगमता से पहुँच सकते हैं।
श्री कलकलेश्वर महादेव मंदिर का अनूठा और दिव्य स्वरूप (Kalakaleshwar Mahadev Temple Architecture)
Kalakaleshwar Mahadev Temple Ujjain का वातावरण परिवार के साथ दर्शन करने के लिए एक परम शांति का केंद्र है।
- यहाँ गर्भगृह में एक अत्यंत प्राचीन और चमत्कारी शिवलिंग स्थापित है, जिसके दर्शन मात्र से ही अशांत मन तुरंत स्थिर हो जाता है।
- मंदिर का ढांचा और परिसर बहुत ही सादगी से भरा है, जो भक्तों को कलयुग के शोरगुल से दूर ले जाकर महादेव की भक्ति में लीन कर देता है।
- इस दिव्य स्थल पर आकर दर्शनार्थी नकारात्मक विचारों से मुक्त होकर सकारात्मक ऊर्जा महसूस करते हैं।
कलकलेश्वर महादेव की पौराणिक कथा: जब शिव-पार्वती के कलह को दूर करने के लिए प्रकट हुआ शिवलिंग (Legend of Kalakaleshwar Mahadev)
स्कंद पुराण के अवंति खंड के अंतर्गत ‘चतुरशीतिलिंग माहात्म्य’ में Kalakaleshwar Mahadev मंदिर उज्जैन का इतिहास और इनकी स्थापना की एक अत्यंत रोचक और दिव्य कथा मिलती है:
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार जगन्माता पार्वती विभिन्न मातृकाओं के साथ एक सुंदर मंडप में विराजमान थीं। उसी समय भगवान शिव वहाँ पहुँचे और उन्होंने हास्य-परिहास (मजाक) में देवी पार्वती के गहरे वर्ण (रंग) को देखकर कह दिया, ‘हे महाकाली! तुम मेरे इस गौर (गोरे) वर्ण के समीप बैठो। तुम्हारा यह कृष्ण (काला) वर्ण मेरी सफेद वेशभूषा के साथ वैसे ही चमकेगा जैसे काले बादलों के बीच बिजली दमकती है।’
भगवान शिव की यह बात सुनकर माता पार्वती रुष्ट (क्रोधित) हो गईं। उन्होंने अत्यंत स्वाभिमान के साथ कहा, ‘हे महादेव! जब आपने देवर्षि नारद को मेरे पिता (हिमालय) के पास विवाह का प्रस्ताव लेकर भेजा था, तब क्या आपने मेरा रंग नहीं देखा था? आज आप मेरा उपहास उड़ा रहे हैं!’ माता पार्वती का यह क्रोध एक भीषण कलह (विवाद) में बदल गया। इस दिव्य कलह के कारण तीनों लोकों में प्राकृतिक असंतुलन फैल गया और पंचतत्व (अग्नि, वायु, जल, पृथ्वी, आकाश) बुरी तरह प्रभावित होने लगे।
तीनों लोकों में मचे हाहाकार को देखकर सभी देवता और ऋषि अत्यंत भयभीत हो गए। उसी समय इस भीषण कलह को शांत करने के लिए अचानक पृथ्वी को चीरकर एक दिव्य और तेजोमय शिवलिंग प्रकट हुआ, जिससे एक आकाशवाणी सुनाई दी, ‘हे महादेव! हे देवी पार्वती! आप दोनों इस दिव्य लिंग का पूजन करें। इस लिंग के प्रभाव से संसार का सारा कलह शांत हो जाएगा।’
यह सुनकर भगवान शिव और देवी पार्वती के साथ-साथ सभी देवताओं ने उस प्रकट हुए दिव्य शिवलिंग की पूरे भक्तिभाव से पूजा-अर्चना की। शिवलिंग की पूजा करते ही माता पार्वती का क्रोध तुरंत शांत हो गया और तीनों लोकों में पुनः शांति और संतुलन की स्थापना हुई। चूंकि इस दिव्य शिवलिंग की उत्पत्ति और पूजा से शिव-पार्वती के बीच का भयंकर कलह दूर हुआ था, इसलिए महादेव की आज्ञा से इस शिवलिंग का नाम कलकलेश्वर महादेव (Kalakaleshwar Mahadev) पड़ा।
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श्री कलकलेश्वर महादेव के दर्शन के लाभ (Significance & Benefits of Worshiping Shri Kalakaleshwar Mahadev)
- पारिवारिक कलह और गृह-क्लेश से मुक्ति: जिन परिवारों में अक्सर बिना बात के झगड़े, पति-पत्नी में वैचारिक मतभेद या कलह रहता है, उनके लिए यहाँ जलाभिषेक करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इससे परिवार में समरसता और प्रेम बढ़ता है।
- अवरोधों और बाधाओं का नाश: यदि आपके किसी महत्वपूर्ण धार्मिक संकल्प या व्यावसायिक कार्य में लगातार अड़चनें आ रही हैं, तो कलकलेश्वर महादेव का पूजन उन सभी बाधाओं का नाश करता है.
- समस्त भयों से सुरक्षा: स्कंद पुराण के अनुसार, यहाँ श्रद्धापूर्वक आराधना करने से मनुष्यों को सर्प भय, अग्नि भय, शत्रु भय और असाध्य रोगों के भय से सदा के लिए मुक्ति मिल जाती है।
Shri Kalakaleshwar Mahadev ke दर्शन के लिए सबसे उत्तम और शुभ समय (Best Time to Visit)
कलकलेश्वर महादेव मंदिर में पूजा वैसे तो कभी भी की जा सकती है, लेकिन कुछ विशेष तिथियों पर की गई पूजा का प्रभाव अनंत गुना बढ़ जाता है:
- श्रावण (सावन) का पवित्र महीना और अधिक मास (पुरुषोत्तम मास)।
- सोमवार का दिन, जो भगवान शिव की आराधना के लिए परम फलदायी है।
- प्रत्येक महीने की चतुर्दशी तिथि, जिस दिन इस शिवलिंग के दर्शन का शास्त्रों में विशेष विधान बताया गया है।
- महाशिवरात्रि, इस महापर्व पर मोदी की गली के इस ऐतिहासिक मंदिर में भगवान शिव का अलौकिक श्रृंगार और रुद्राभिषेक का भव्य आयोजन किया जाता है।
FAQ: Apsareshwar Mahadev Mandir उज्जैन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सवाल
प्रश्न 1: चौरासी महादेव यात्रा में Kalakaleshwar Mahadev का कौन सा स्थान है?
उत्तर: श्री कलकलेश्वर महादेव उज्जैन की प्रसिद्ध चौरासी महादेव यात्रा श्रृंखला के 18वें (18th) क्रम पर आते हैं।
प्रश्न 2: कलकलेश्वर महादेव का मंदिर उज्जैन में कहाँ स्थित है?
उत्तर: Kalakaleshwar Mahadev Mandir उज्जैन के प्रसिद्ध पटनी बाजार क्षेत्र में मोदी की गली (Modi ki Gali) के भीतर, प्रसिद्ध गोपाल मंदिर के पास और अग्रवाल धर्मशाला के बिल्कुल सामने स्थित है।
प्रश्न 3: कलकलेश्वर महादेव की कहानी किस पौराणिक घटना से जुड़ी है?
उत्तर: Kalakaleshwar Mahadev ki Pauranik कथा भगवान शिव द्वारा माता पार्वती को हास्य में ‘काली’ कहने से उत्पन्न हुए भयंकर कलह (विवाद) और उसे शांत करने के लिए पृथ्वी चीरकर प्रकट हुए दिव्य शिवलिंग से जुड़ी है।
प्रश्न 4: इस मंदिर में पूजा करने से गृह-क्लेश से कैसे मुक्ति मिलती है?
उत्तर: शास्त्रों के अनुसार, चूंकि Kalakaleshwar Mahadev शिवलिंग का प्राकट्य ही शिव-पार्वती के कलह को शांत करने के लिए हुआ था, इसलिए यहाँ की गई विशेष पूजा-अर्चना पति-पत्नी के आपसी मनमुटाव को दूर कर वैवाहिक जीवन में असीम शांति और समरसता लाती है।
Disclaimer: दोस्तों, यह जानकारी इंटरनेट सोर्सेज से ली गयी है। लेकिन आप अगर यात्रा पर जाये तो पहले अच्छे से पता कर ले। धर्मकहानी का उद्देश्य सटीक सूचना आप तक पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता सावधानी पूर्वक पढ़ और समझकर ही लें। अगर इसमें आपको कोई गलती लगाती है तो कृपया आप हमें हमारे ऑफिसियल ईमेल पर जरूर बताये।
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