Somvati Amavasya Katha : सोमवती अमावस्या के महत्व को समझने के लिए हमारे शास्त्रों में दो अत्यंत सुंदर और विस्तृत लोककथाएं मिलती हैं, जिन्हें इस व्रत के दिन श्रद्धापूर्वक सुनना आवश्यक माना गया है।
Somvati Amavasya Katha 1 : गरीब ब्राह्मण की पुत्री और सोना धोबिन
प्राचीन काल में एक अत्यंत गरीब ब्राह्मण परिवार रहता था, जिसमें पति-पत्नी के अलावा उनकी एक परम सुंदर, सुशील और सर्वगुण संपन्न पुत्री थी। कन्या के बड़े होने पर भी अत्यंत दरिद्रता के कारण उसका विवाह नहीं हो पा रहा था। एक दिन उनके घर एक पहुंचे हुए साधु महाराज पधारे। कन्या की सच्ची सेवा से प्रसन्न होकर उन्होंने उसे लंबी आयु का आशीर्वाद तो दिया, लेकिन ध्यान लगाने पर पाया कि कन्या के हाथ में विवाह का योग ही नहीं है और उसके भाग्य में वैधव्य का भयंकर श्राप है।
ब्राह्मण दंपति के व्याकुल होने पर साधु ने उपाय बताते हुए कहा कि सात समुद्र पार एक गांव में ‘सोना’ (या सोमा) नाम की एक धोबिन रहती है, जो अत्यंत पतिव्रता और आचार-विचार से संपन्न है। यदि यह कन्या उनके घर जाकर उनकी गुप्त सेवा करे और विवाह के समय वह धोबिन अपनी मांग का सिंदूर इस कन्या की मांग में लगा दे, तो इसका वैधव्य योग नष्ट हो सकता है।
कन्या ने अगले दिन से ही बहुत सुबह उठकर सोना धोबिन के घर जाना शुरू कर दिया। वह चुपचाप धोबिन के घर का झाड़ू-पोछा, गोबर फेंकना और बर्तन मांजना जैसे सारे काम करके उजाला होने से पहले अपने घर लौट आती थी। सोना धोबिन अपनी बहुओं से पूछने लगी कि तुम दोनों आपस में बिना लड़े घर का सारा काम इतनी सुबह कैसे कर लेती हो। बहुओं ने कहा कि मांजी, हम तो देर से उठती हैं, हमें लगा कि आप ही सुबह उठकर सारा काम कर लेती हैं। सच्चाई जानने के लिए सोना धोबिन रात को छिपकर बैठ गई। उसने देखा कि एक सुंदर कन्या मुंह अंधेरे आती है और सारा काम करने लगती है। धोबिन ने तुरंत उसके पैर पकड़ लिए और पूछा कि वह कौन है और इस तरह चाकरी क्यों कर रही है।
कन्या ने साधु द्वारा बताई गई सारी बात कह सुनाई। पतिव्रता सोना धोबिन तुरंत उसके साथ जाने को तैयार हो गई। उसने अपने पति से कहा कि जब तक मैं वापस न आऊं, घर पर ही रहना और यदि मेरे पीछे से तुम्हारी मृत्यु हो जाए, तो बहुओं से कहकर शरीर को तेल के पीपे (कूपे) में सुरक्षित रखवा देना। धोबिन ने ब्राह्मण के घर पहुंचकर जैसे ही अपनी मांग का सिंदूर उस कन्या की मांग में लगाया, वैसे ही उसका पतिव्रता तेज कन्या में स्थानांतरित हो गया और दूर गांव में उसके बीमार पति की मृत्यु हो गई।
धोबिन को इस बात का आभास हो गया। वह बिना अन्न-जल ग्रहण किए वहां से वापस चल पड़ी। रास्ते में उसे एक पीपल का पेड़ दिखाई दिया। चूंकि उस दिन सोमवती अमावस्या थी, इसलिए उसने निश्चय किया कि वह पीपल की परिक्रमा करके ही जल ग्रहण करेगी। ब्राह्मण के घर मिले स्वादिष्ट पकवानों के स्थान पर उसने जमीन से ईंट और मिट्टी के 108 टुकड़े उठाए और प्रत्येक टुकड़े को पीपल की जड़ में अर्पित करते हुए 108 बार परिक्रमा की। जैसे ही उसकी परिक्रमा पूर्ण हुई और उसने जल पिया, वैसे ही उसके मृत पति के शरीर में चेतना लौट आई और वह जीवित हो गया।
Somvati Amavsya 2026: सोमवती अमावस्या तिथि, शुभ मुहूर्त, पितृ तर्पण और पूजा विधि
Somvati Amavasya Katha 2: साहूकार की पुत्री, गरुड़ के बच्चे और सुहाग की रक्षा
एक अन्य कथा के अनुसार, एक प्रतापी साहूकार के सात बेटे, सात बहुएं और एक बेटी थी। उनके घर रोज एक जोगी भिक्षा मांगने आता था। जब बहुएं भिक्षा देतीं तो वह ले लेता, लेकिन जब साहूकार की बेटी भिक्षा देने आती तो वह मना कर देता और कहता कि इसके भाग्य में वैधव्य (दुहाग) लिखा है। मां के पूछने पर जोगी ने बताया कि सात समुद्र पार रहने वाली सोमा धोबिन ही इसका दुहाग टाल सकती है। साहूकार का सबसे छोटा बेटा अपनी बहन को लेकर सोमा धोबिन की खोज में निकल पड़ा।
चलते-चलते रास्ते में तेज धूप होने के कारण वे एक विशाल पीपल के पेड़ के नीचे बैठ गए। उस पेड़ पर गरुड़ पक्षी का एक घोंसला था, जिसमें उसके नवजात बच्चे थे। तभी एक विशाल सांप पेड़ पर चढ़कर बच्चों को खाने के लिए लपका। साहूकार की बेटी ने फुर्ती दिखाते हुए सांप को मार डाला और बच्चों की रक्षा की। थोड़ी देर बाद जब गरुड़नी वापस आई, तो चारों तरफ खून देखकर उसे लगा कि इस लड़की ने उसके बच्चों को मार दिया है, और वह उसे चोंच से मारने लगी। लड़की ने चिल्लाकर कहा कि मैंने तो सांप से तुम्हारे बच्चों की जान बचाई है। बच्चों ने भी अपनी मां को सारी सच्चाई बताई। प्रसन्न होकर गरुड़नी ने उन दोनों भाई-बहन को अपनी पीठ पर बिठाया और सोमा धोबिन के घर पहुंचा दिया।
वहां भी लड़की ने चुपचाप सोमा धोबिन के घर की गुप्त सेवा की। पकड़े जाने पर सोमा धोबिन ने वचन के अनुसार लड़की के विवाह में सुहाग देने का निर्णय लिया। विवाह के फेरों के समय जब सोमा धोबिन कच्चा सूत, दूध का करवा और तार लेकर बैठी, तो वही सांप दूल्हे को डसने आया। सोमा धोबिन ने अपने तपोबल से सांप को करवे में बंद कर दिया और दूल्हे के प्राण बचा लिए। वापसी में सोमा धोबिन ने मिट्टी के 108 टुकड़ों से पीपल की परिक्रमा कर सोमवती अमावस्या का व्रत पूर्ण किया, जिसके प्रभाव से घर लौटने पर उसका पति भी पुनर्जीवित हो गया।
जब पुरोहित ने आकर दान मांगा, तो सोमा धोबिन के पास देने के लिए कुछ नहीं था। उसने पीपल के नीचे दबे मिट्टी के टुकड़ों को निकाला, तो सोमवती माता की कृपा से वे सभी टुकड़े चमचमाते हुए सोने और हीरों में बदल चुके थे।
Ashta Bhairav : भैरव बाबा के 8 रूप और उनके रहस्य.
सनातन धर्म में Somvati Amavasya Katha को अत्यंत पुण्यदायी और फलदायी माना गया है। इस दिन व्रत, स्नान, दान, पितृ तर्पण तथा पीपल पूजन का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए इस व्रत से अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी महत्व को समझाने के लिए पुराणों और लोक परंपराओं में कई प्रेरणादायक कथाओं का वर्णन मिलता है। इन कथाओं में पतिव्रता धर्म, सेवा, त्याग, श्रद्धा और सोमवती अमावस्या व्रत की अद्भुत महिमा का वर्णन किया गया है। आइए जानते हैं सोमवती अमावस्या से जुड़ी दो प्रमुख और प्रचलित कथाएं।




