Dev Uthani Ekadashi vrat date muhurat

Dev Uthani Ekadashi 2026 : देवउठनी एकादशी कब हैं, शुभ मुहूर्त जानिए देवउठनी ग्यारस कथा।

Dev Uthani Ekadashi 2026 Date, Muhurat and Dev Uthani Gyaras Katha देवउठनी एकादशी शनिवार 19 नवम्बर 2026 को हैं। मान्यता हैं की देव उठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु चतुर्थमास की योगनिद्रा के बाद उठते हैं। इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करने से विशेष फल मिलता हैं, मनोकामना की पूर्ति होती हैं।

Dev Uthani Ekadashi 2026 Date

हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देव उठान एकादशी और देवउठनी एकादशी (Dev Uthani Ekadashi) भी कहते हैं क्योंकि मान्यता है कि इस दिन चार्तुमास के बाद भगवान विष्णु (lord Vishnu) योगनिद्रा से जागते हैं। इस दिन के बाद से शादी ब्याह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्यक्रम फिर से शुरु हो जाते हैं। चलिए जानते हैं कि इस साल देवउठनी एकादशी किस दिन पड़ रही है।

देवउठनी एकादशी इस साल 29 सितम्बर 2026 को शाम 07 बजकर 05 मिनट बजे से शुरू होकर 30 सितम्बर 2026 को रात 08 बजकर 03 मिनट  बजे बजे समाप्त हो रही हैं। चुकी सनातम धर्म में सूर्योदय वाले दिन यदि 30 सितम्बर 2026 को देव उतनी एकादशी का व्रत व पूजन किया जायगा।

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Dev Uthani Ekadashi 2026 Muhurat

देवउठनी एकादशी पर भगवन विष्णु और माता लक्ष्मी का पूजन व आराधना की जाती हैं। भगवान विष्णु के पूजन का मुहूर्त सुबह 6. 42 मिनट से आरंभ हो रहा है. इसके बाद 7.42 मिनट से सर्वार्थ सिद्धि योग भी लग रहा है जिसमें पूजा करना बहुत ज्यादा लाभकारी होगा।

देवउठनी एकादशी के दिन भगवान शालिग्राम का तुलसी के साथ विवाह भी किया जाता हैं। भगवान शालिग्राम भी विष्णु का रूप मने जाते हैं। देवउठनी एकादशी को प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता हैं।

क्या है देवउठनी एकादशी का महत्व | Importance of Dev Uthani Ekadashi


देवउठनी एकादशी व्रत की महिमा ही अपरम्पार हैं। इस दिन चार माह से सोए भगवान विष्णु शीर सागर में नींद से उठ जाते हैं। इस दिन हिंदू समुदाय या कहे सनातन धर्म में सभी मांगलिक कार्यों जैसे शादी ब्याह, सगाई, मुंडन, गृह प्रवेश आदि पर लगी रोक हट जाती है और मांगलिक कार्यक्रम आरंभ हो जाते हैं।

मान्यता तो यह भी हैं कि इस दिन यदि भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का पूजन पूरी श्रद्धा और विश्वास से किया जाये को सांसारिक पापों से मुक्ति मिलती है और जातक को मोक्ष की प्राप्ति होती है।  

एकादशी के दिन व्रत करने वाले इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और सांसारिक पापों से मुक्ति की मनोकामना मांगते हैं। इस दिन भगवान विष्णु की शालिग्राम भगवान के रूप में तथा तुलसी देवी की भी पूजा की जाती है।

Tulsi Vivah 2026 Vidhi and Samagry

Dev Uthani Ekadashi Vrat : देवउठनी एकादशी व्रत विधि / नियम

Dev Uthani Ekadashi का व्रत सभी को करना चाहिए कहा जाता हैं की भगवान विष्णु जब निंद्रा से उठते हैं तब वे भक्तों की पूजन से प्रसन्न होकर आशीर्वाद प्रदान करते हैं। आज के दिन की पूजा से माता लक्ष्मी भी प्रसन होती हैं और घर में धनधान्य की कमी नहीं होने देती। परन्तु जब देवउठनी एकादशी व्रत विधि (Dev Uthani Ekadashi Vrat Vidhi) विधान से किया जाता हैं उसकी महिमा ही अलग होती हैं इसीलिए आज हम लेकर आये हैं देवउठनी एकादशी व्रत की विधि (Dev Uthani Ekadashi Vrat Niyam) या कहे नियम जो आपके व्रत को अधिक प्रभावशाली बनाते हैं। इनका पालन जरूर करने चाहिए।

Dev Uthani Ekadashi Date, Muhurat and Dev Uthani Gyaras Katha
  • देवोत्थान एकादशी के दिन सुबह-सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि कर लेना चाहिए।
  • स्नान के बाद गन्ने का मंडप बनाएं और बीच में चौक या कहे स्वस्तिक बनाएं।
  • चौक के मध्य में भगवान विष्णु का चित्र या मूर्ति रखें।
  • इसके साथ ही चौक से भगवान के चरण चिह्न बनाए जाते हैं, जो ढककर रखने चाहिए।
  • भगवान को गन्ना, सिंगाड़ा और पीले फल-मिठाई अर्पित करना चाहिए।
  • इसके साथ ही भगवान को पीली मिठाई  करें।
  • इसके बाद घी का एक दीपक जलाएं और इसे रात भर जलने दें।
  • यहीं पर बैठकर विष्णु पुराण और व्रत कथा सुनें भजन कीर्तन करना चाहिए।

Dev Uthani Ekadashi Vrat Katha : देवउठनी एकादशी व्रत कथा


आइये आपको देव उठनी एकादशी व्रत की कथा बताते हैं। एक राज्य में एकादशी के दिन प्रजा से लेकर पशु तक कोई भी अन्न नहीं ग्रहण करता था। एक दिन भगवान विष्णु ने राजा की परीक्षा लेने की सोची और सुंदरी भेष बनाकर सड़क किनारे बैठ गए। राजा की भेंट जब सुंदरी से हुई तो उन्होंने उसके यहां बैठने का कारण पूछा. स्त्री ने बताया कि वह बेसहारा है. राजा उसके रूप पर मोहित हो गए और बोले कि तुम रानी बनकर मेरे साथ महल चलो।

सुंदर स्त्री के राजा के सामने शर्त रखी कि ये प्रस्ताव तभी स्वीकार करेगी जब उसे पूरे राज्य का अधिकार दिया जाएगा और वह जो बनाए राजा को खाना होगा. राजा ने शर्त मान ली। अगले दिन एकादशी पर सुंदरी ने बाजारों में बाकी दिनों की तरह अन्न बेचने का आदेश दिया. मांसाहार बनाकर राजा को खाने पर मजबूर करने लगी. राजा ने कहा कि आज एकादशी के व्रत में तो मैं सिर्फ फलाहार ग्रहण करता हूं. रानी ने शर्त याद दिलाते हुए राजा को कहा कि अगर यह तामसिक भोजन नहीं खाया तो मैं बड़े राजकुमार का सिर धड़ से अलग कर दूंगी।


राजा ने अपनी स्थिति बड़ी रानी को बताई. बड़ी महारानी ने राजा से धर्म का पालन करने की बात कही और अपने बेटे का सिर काट देने को मंजूर हो गई। राजा हताश थे और सुंदरी की बात न मानने पर राजकुमार का सिर देने को तैयार हो गए। सुंदरी के रूप में श्रीहरि राजा के धर्म के प्रति समर्पण को देखर अति प्रसन्न हुए और उन्होंने अपने असली रूप में आकर राजा को दर्शन दिए।


देवउठनी एकादशी पर बहुत से नियमों का पालन करना जरूरी होता है। इस दिन केवल निर्जल या जलीय पदार्थों पर ही उपवास रखना चाहिए. अगर व्रत रखने वाला रोगी, वृद्ध, बालक या व्यस्त व्यक्ति हैं तो वह केवल एक वेला का उपवास रख सकता है। इस दिन चावल और नमक से परहेज करना चाहिए. भगवान विष्णु की उपासना करना अच्छा रहता है. देवउठनी एकादशी के दिन तामसिक आहार (प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा या बासी भोजन) का सेवन बिल्कुल न करें।  

देवउठनी एकादशी से जुड़े सवाल

देवउठनी एकादशी (devthan 2026 FAQ) से जुड़े सवाल जिनके जवाब आपके लिए जानना ज़रूरी हैं।

देवउठनी एकादशी 2026 कब है?

देवउठनी एकादशी वर्ष 2026 में 20 नवंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। Devudni Gyaras दिन भगवान विष्णु चार माह की योगनिद्रा से जागते हैं और सभी मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है।

देवउठनी एकादशी को देवोत्थान एकादशी क्यों कहा जाता है?

इस दिन भगवान विष्णु 4 मास की योगनिद्रा से जागते हैं, इसलिए इसे देवोत्थान एकादशी, देवउठनी एकादशी, प्रबोधिनी एकादशी और देवउठनी ग्यारस के नाम से जाना जाता है। इसी दिन से सभी शुभ कार्य प्रारम्भ हो जाते हैं।

देवउठनी एकादशी पर तुलसी विवाह क्यों किया जाता है?

देवउठनी एकादशी के दिन भगवान शालिग्राम (विष्णु) और माता तुलसी का विवाह कराया जाता है। इसे अत्यंत शुभ माना जाता है और इससे वैवाहिक सुख, समृद्धि तथा भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। तुलसी विवाह जिस घर में किया जाता हैं वहाँ सुख शांति व समृद्धि भी प्राप्त होती हैं। तुलसी विवाह ना करा सको तो तुलसी जी का दर्शन करना चाहिए।

देवउठनी एकादशी के दिन कौन-कौन से शुभ कार्य शुरू किए जा सकते हैं?

देवउठनी एकादशी के दिन से विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण, सगाई, यज्ञ, नए व्यवसाय की शुरुआत और अन्य मांगलिक कार्यों का शुभारंभ होती है।

देवउठनी एकादशी पर क्या दान करना चाहिए?

तुलसी विवाह वाले दिन पंडित को अन्न दान, वस्त्र, दीपदान, तुलसी का पौधा, पीले वस्त्र, फल, गुड़, घी तथा जरूरतमंदों को भोजन कराने का विशेष महत्व बताया गया है। एकादशी का विशेष महत्त्व वैष्णो मार्गी के लिए होता हैं।

Dharmkahani : उम्मीद करते हैं आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा यदि आपको भी वरुथिनी एकादशी से जुड़ा कोई संकोच हैं। हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताये हम जल्द से जल्द उतर देने या नया पोस्ट लाने में कार्यरथ हैं।

वरुथिनी एकादशी की व्रत कथा और महत्त्व

विष्णु अवतार गिरिराज आरती

Disclaimer: (Dev Uthani Ekadashi) देवउठनी एकादशी जानकारी हमने कई इंटरनेट सोर्सेज और लोक कथाओ और कहानियों के माध्यम से ली है। धर्मकहानी का उद्देश्य धर्म की सटीक सूचना आप तक पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता सावधानी पूर्वक पढ़ और समझकर ही लें। अगर इसमें आपको कोई गलती लगती है तो कृपया आप हमें हमारे ऑफिशल ईमेल पर जरूर बताये।

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